04 Nov तमिलनाडु में 50% से अधिक स्टार्टअप महिला-नेतृत्व में: स्टार्टअपटीएन

✎ महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप की वृद्धि के लिए केवल ‘अवसर की समानता’ (अनुच्छेद 16) पर्याप्त नहीं है, बल्कि अनुच्छेद 15(3) के अंतर्गत विशेष उपायों और ‘अवसंरचना की समानता’ (क्रेच, सुरक्षा, लचीले कार्य) दोनों आवश्यक हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — शासन: सरकारी नीतियाँ एवं हस्तक्षेप, जो महिलाओं और उद्यमिता से संबंधित हैं | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — अर्थव्यवस्था: स्टार्टअप, उद्यमिता और रोज़गार सृजन | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र I — सामाजिक मुद्दे: महिलाओं की भागीदारी और लैंगिक समानता
- Prelims: स्टार्टअप इंडिया (Startup India) — DPIIT, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, स्टैंड-अप इंडिया (Stand-Up India) योजना — अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला उद्यमियों के लिए बैंक ऋण, महिला उद्यमिता मंच (Women Entrepreneurship Platform) — नीति आयोग, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (POSH Act), कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 149 — निदेशक मंडल में महिला निदेशक से संबंधित उपबंध, मातृत्व लाभ अधिनियम, 2017 (Maternity Benefit Act, 2017), व्यवसाय उत्तरदायित्व एवं स्थिरता रिपोर्ट (BRSR) — SEBI, अनुच्छेद 15(3) — महिलाओं और बच्चों के लिए राज्य द्वारा विशेष उपबंध, ESG (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) मानदंड
- Essay: ‘अवसर की समानता’ पर्याप्त है या ‘अवसंरचना की समानता’ भी आवश्यक है? — महिलाओं की नेतृत्वकारी भूमिका के संदर्भ में, नवाचार और आर्थिक संवृद्धि में विविधता (Diversity) की भूमिका: समावेशी कार्यसंस्कृति का आर्थिक तर्क
त्वरित पुनरावृत्ति: महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप की वृद्धि के लिए केवल ‘अवसर की समानता’ (अनुच्छेद 16) पर्याप्त नहीं है, बल्कि अनुच्छेद 15(3) के अंतर्गत विशेष उपायों और ‘अवसंरचना की समानता’ (क्रेच, सुरक्षा, लचीले कार्य) दोनों आवश्यक हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
तमिलनाडु के स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ी एक ताज़ा जानकारी सामने आई है। स्टार्टअप तमिलनाडु (StartupTN) के अध्यक्ष सिंगई जी. रामचंद्रन के अनुसार राज्य में 16,000 से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप हैं, जिनमें से 50.8 प्रतिशत महिला-नेतृत्व वाली फर्में हैं। यह बात चेन्नई में आयोजित ‘बेस्ट ऑफ बेस्ट’ (Best of Best) सम्मेलन और पुरस्कार 2026 में कही गई। इसी कार्यक्रम में उन्होंने महिलाओं के लिए आवश्यक अवसंरचना की ओर ध्यान दिलाया, यानी केवल महिलाओं को नियुक्त करना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनके लिए उपयुक्त कार्य-परिवेश तैयार करना भी ज़रूरी है। कार्यक्रम में अवतार करियर क्रिएटर्स लिमिटेड और सेरामाउंट द्वारा ‘सर्कल ऑफ इंक्लूसिव कल्चर्स’ (Circle of Inclusive Cultures) पहल का शुभारंभ भी हुआ, जिसका उद्देश्य संगठनों के बीच समावेशन से जुड़े व्यावहारिक अनुभवों का आदान-प्रदान करना है।
पृष्ठभूमि
- भारत में स्टार्टअप को नीतिगत मान्यता 2016 में स्टार्टअप इंडिया पहल के साथ मिली, जिसका संचालन उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) करता है। DPIइT की परिभाषा के अनुसार निगमन के 10 वर्ष तक की इकाई, जिसका वार्षिक कारोबार ₹100 करोड़ से अधिक न हो और जो नवाचार या सुधार पर केंद्रित हो, स्टार्टअप मानी जाती है।
- स्टार्टअप तमिलनाडु राज्य स्तर पर इस क्षेत्र के समन्वय और संवर्धन से जुड़ी संस्था है। राज्य स्तर की ऐसी संस्थाएँ नीति, मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता के बीच सेतु का काम करती हैं।
- महिला उद्यमिता के लिए नीति आयोग ने महिला उद्यमिता मंच (2018) बनाया, जबकि स्टैंड-अप इंडिया योजना (2016) अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला उद्यमियों को ऋण उपलब्ध कराती है। मुद्रा योजना (2015) सूक्ष्म उद्यमों के लिए ऋण की पहुँच बढ़ाती है।
- कार्यस्थल पर महिलाओं से संबंधित विधिक ढाँचे में POSH अधिनियम, 2013 (कार्यस्थल पर सुरक्षा और शिकायत निवारण), मातृत्व लाभ अधिनियम, 2017 और कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 149 के अंतर्गत निदेशक मंडल में महिला प्रतिनिधित्व से संबंधित उपबंध शामिल हैं।
- कॉर्पोरेट क्षेत्र में ESG मानदंडों और SEBI की BRSR रिपोर्टिंग के बढ़ते प्रभाव के कारण विविधता और समावेशन अब प्रकटीकरण और निवेश-निर्णय से भी जुड़ गए हैं। इसी संदर्भ में ‘बेस्ट कंपनीज़ फॉर विमेन इन इंडिया’ और ‘मोस्ट इन्क्लूसिव कंपनीज़ इंडेक्स’ जैसे बेंचमार्क विकसित हुए हैं।
महिला-नेतृत्व वाला स्टार्टअप और समावेशी कार्यस्थल क्या है?
- महिला-नेतृत्व वाला स्टार्टअप वह उद्यम है जिसमें निर्णय-निर्माण, स्वामित्व या प्रबंधन की प्रमुख भूमिका महिलाओं के पास हो। इसकी कोई एक सार्वभौमिक परिभाषा नहीं है, इसलिए विभिन्न आँकड़ों की तुलना करते समय उनकी पद्धति जाँचना आवश्यक है।
- स्टार्टअप की परिभाषा में नवाचार, स्केलेबिलिटी और निगमन की अवधि जैसे मानदंड होते हैं, जबकि महिला-नेतृत्व का निर्धारण सामान्यतः स्वामित्व और प्रबंधन संरचना से किया जाता है।
- समावेशी कार्यस्थल वह परिवेश है जहाँ लिंग, जाति, धर्म या क्षमता के आधार पर भेदभाव न हो और सभी को समान अवसर, वेतन, सुरक्षा और पदोन्नति का मार्ग मिले।
- अवसर की समानता (Equality of Opportunity) का संवैधानिक आधार अनुच्छेद 16 में है, जबकि अनुच्छेद 15(3) राज्य को महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष उपबंध बनाने की अनुमति देता है।
- अवसंरचना की समानता में क्रेच, सुरक्षित परिवहन, लचीले कार्य-घंटे, मातृत्व अवकाश के बाद वापसी की व्यवस्था और सुरक्षित कार्य-परिवेश शामिल हैं।
- स्टार्टअप की वृद्धि में पूंजी तक पहुँच, बाज़ार-संपर्क और नेटवर्किंग की भूमिका होती है; महिला उद्यमियों के लिए इन तक पहुँच की बाधाएँ अक्सर अलग स्वरूप में होती हैं, इसलिए लक्षित नीतियाँ उपयोगी होती हैं।
- नीतिगत स्तर पर POSH अधिनियम, मातृत्व लाभ अधिनियम और कंपनी अधिनियम के प्रावधान न्यूनतम विधिक ढाँचा देते हैं, जबकि समावेशन सूचकांक और पीयर-लर्निंग मंच व्यवहार में सुधार के उपकरण हैं।
- ESG और BRSR जैसे प्रकटीकरण ढाँचे कंपनियों को लैंगिक विविधता के आँकड़े सार्वजनिक करने के लिए प्रेरित करते हैं, जिससे जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ती है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| तमिलनाडु में पंजीकृत स्टार्टअप | 16,000 से अधिक (StartupTN के अध्यक्ष के अनुसार) |
| महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप का अनुपात | 50.8 प्रतिशत (अध्यक्ष द्वारा सार्वजनिक कथन में बताया गया आंकड़ा) |
| समावेशी संस्कृति चक्र (Circle of Inclusive Cultures, CIC) | Avtar Career Creators Limited और Seramount द्वारा आरंभ; CEO, CHRO और समावेशन नेताओं के लिए साथी-शिक्षण मंच |
| कार्यस्थल कल्याण का नया मानदंड | सर्वोत्तम में सर्वोत्तम सम्मेलन (Best of Best Conference, BoB) 2026 में Best Companies for Workplace Wellness श्रेणी जोड़ी गई |
| पुरुष सहयोगी सम्मान | Male Ally Legacy Award के माध्यम से समावेशी कार्यवातावरण बनाने में पुरुष नेतृत्व की मान्यता |
महत्व
आर्थिक
- नवाचार और उद्यमिता में लैंगिक विविधता से उत्पादकता और बाज़ार की समझ बढ़ती है।
- महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप रोज़गार सृजन और सेवा-क्षेत्र में नए अवसर पैदा करने का स्रोत बन सकते हैं।
- प्रतिभा का पूर्ण उपयोग आर्थिक संवृद्धि की गुणवत्ता को सुधारता है।
सामाजिक
- कार्यस्थल पर भूमिकाओं को लेकर प्रचलित धारणाओं को चुनौती मिलती है।
- महिलाओं की आर्थिक सहभागिता बढ़ने से परिवार और समुदाय की आय-संरचना पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- पुरुष सहयोगियों की मान्यता से लैंगिक समानता को संगठनात्मक संस्कृति का हिस्सा बनाने का संदेश मिलता है।
प्रशासनिक और नीतिगत
- राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी द्वारा आंकड़ों का प्रकाशन नीति-मूल्यांकन का आधार बनता है।
- निजी क्षेत्र के बेंचमार्क और राज्य की नीति एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं।
- समावेशन मानकों का स्वैच्छिक अपनाना नियामकीय बाध्यता से पहले सुधार का मार्ग खोलता है।
चुनौतियाँ
1. आंकड़ों की परिभाषा और तुलनीयता
- महिला-नेतृत्व की परिभाषा स्पष्ट नहीं है; स्वामित्व, प्रबंधन और निदेशक मंडल में से किसे आधार माना गया, यह सार्वजनिक रूप से नहीं बताया गया।
- पंजीकृत स्टार्टअप और सक्रिय स्टार्टअप की संख्या में अंतर हो सकता है, जिससे अनुपात प्रभावित होता है।
- प्रस्तुत 50.8 प्रतिशत आंकड़ा अध्यक्ष के कथन पर आधारित है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि अलग से आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: शासन में डेटा की गुणवत्ता और पारदर्शिता (सामान्य अध्ययन-द्वितीय)
2. कार्यस्थल अवसंरचना का अभाव
- प्रतिभा के लिए उपयुक्त अवसंरचना, जैसे सुरक्षित परिवहन, कार्यस्थल पर क्रेच और लचीली कार्य-व्यवस्था, अभी सभी संगठनों में समान रूप से उपलब्ध नहीं है।
- केवल भर्ती करना पर्याप्त नहीं है; बनाए रखने और पदोन्नति के अवसरों पर भी ध्यान देना होगा।
यूपीएससी लिंक: महिलाओं से संबंधित सामाजिक मुद्दे और कार्य-दशाएँ (सामान्य अध्ययन-प्रथम एवं द्वितीय)
3. पारंपरिक लैंगिक धारणाएँ
- कुछ भूमिकाओं को किसी एक लिंग से जोड़ने की मानसिकता सांस्कृतिक स्तर पर बनी हुई है।
- वस्त्र और बाहरी स्वरूप बदलने के बावजूद सामाजिक ढाँचे में बदलाव धीमा रहता है, जैसा कि इस सम्मेलन में भी रेखांकित हुआ।
- सांस्कृतिक परिवर्तन के लिए केवल कानूनी प्रावधान पर्याप्त नहीं होते; व्यवहार और शिक्षा में बदलाव आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: लैंगिक समानता और सामाजिक परिवर्तन में बाधाएँ (सामान्य अध्ययन-प्रथम)
4. पूँजी और नेटवर्क तक पहुँच
- इस समाचार में महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप के वित्त-पोषण से जुड़े ठोस आंकड़े नहीं दिए गए हैं, फिर भी पूँजी तक सीमित पहुँच सामान्यतः एक चुनौती मानी जाती है।
- मेंटरशिप और उद्योग-नेटवर्क की कमी से छोटे स्टार्टअप का विस्तार बाधित हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: उद्यमिता, सूक्ष्म-वित्त और वित्तीय समावेशन (सामान्य अध्ययन-तृतीय)
5. कॉर्पोरेट प्रशासन का नियामकीय दायरा
- कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 149 के तहत कुछ सूचीबद्ध और सार्वजनिक कंपनियों के बोर्ड में एक महिला निदेशक का होना अनिवार्य है।
- अधिकांश स्टार्टअप निजी कंपनियाँ या साझेदारी फर्म के रूप में पंजीकृत होते हैं, इसलिए यह प्रावधान सभी स्टार्टअप पर लागू नहीं होता।
- इससे निदेशक मंडल स्तर पर प्रतिनिधित्व का अंतर बना रह सकता है।
यूपीएससी लिंक: कंपनी अधिनियम और कॉर्पोरेट प्रशासन (सामान्य अध्ययन-तृतीय)
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| महिला-नेतृत्व की परिभाषा | स्वामित्व, प्रबंधन और निदेशक मंडल के आधार पर अनुपात अलग-अलग हो सकता है |
| कार्यस्थल अवसंरचना | क्रेच, सुरक्षित परिवहन और लचीली कार्य-व्यवस्था की कमी से महिलाओं की निरंतर भागीदारी प्रभावित होती है |
| सामाजिक धारणाएँ | भूमिकाओं को लिंग से जोड़ने की मानसिकता नेतृत्व के अवसर सीमित करती है |
| वित्त और मेंटरशिप | पूँजी और नेटवर्क तक असमान पहुँच छोटे स्टार्टअप के विस्तार में बाधा बन सकती है |
| नियामकीय दायरा | कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 149 का दायरा सभी स्टार्टअप तक नहीं फैला है |
| डेटा की विश्वसनीयता | स्वतंत्र सत्यापन के बिना प्रस्तुत आंकड़े नीति-निर्माण में सीमित उपयोगी होते हैं |
आगे की राह
- महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप की एक स्पष्ट परिभाषा और डेटा-मानक तय किए जाएँ, जिसमें स्वामित्व, प्रबंधन और निदेशक मंडल की स्थिति अलग-अलग दर्ज हो।
- पंजीकृत स्टार्टअप और सक्रिय स्टार्टअप के बीच अंतर को नियमित सर्वेक्षण से स्पष्ट किया जाए।
- कार्यस्थल पर क्रेच, सुरक्षित परिवहन और लचीली कार्य-व्यवस्था के लिए प्रोत्साहन दिए जाएँ।
- महिला उद्यमियों के लिए वित्त तक सरल पहुँच और मेंटरशिप नेटवर्क विकसित किए जाएँ।
- समावेशन-शिक्षण के लिए बने मंच, जैसे समावेशी संस्कृति चक्र, छोटे स्टार्टअप तक विस्तारित किए जाएँ।
- सार्वजनिक और निजी क्षेत्र मिलकर समावेशन के स्वैच्छिक मानक अपनाएँ और उनकी नियमित समीक्षा करें।
- पुरुष सहयोगियों की भूमिका को नीति-संवाद और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल किया जाए।
- निजी स्टार्टअप में बोर्ड-स्तरीय प्रतिनिधित्व के नियामकीय दायरे का तुलनात्मक अध्ययन कर उचित विकल्पों पर विचार किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप (Women-led Startups) · अनुच्छेद 15(3) (Article 15(3)) · अनुच्छेद 39(क) (Article 39(a)) · स्टार्टअप इंडिया (Startup India) · स्टैंड-अप इंडिया (Stand-Up India) · कार्यस्थल पर लैंगिक समावेशन (Gender Inclusion at Workplace) · मातृत्व लाभ अधिनियम, 2017 (Maternity Benefit Amendment Act, 2017) · कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (POSH Act, 2013) · सार्वजनिक-निजी सहभागिता का संस्थागत ढाँचा (Institutional Framework of Public-Private Partnership) · वित्तीय समावेशन और महिला उद्यमिता (Financial Inclusion and Women Entrepreneurship)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 15(3): महिलाओं के लिए विशेष उपबंध का आधार
- अनुच्छेद 42: कार्य की न्यायोचित और मानवीय दशाएँ
अवधारणा प्रवाह
राज्य की नोडल एजेंसी द्वारा स्टार्टअप पंजीकरण और आंकड़ों का संकलन → पंजीकृत स्टार्टअप में महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों का लगभग आधा अनुपात सामने आना → कार्यस्थल अवसंरचना और भूमिका-संबंधी धारणाओं पर ध्यान केंद्रित होना → समावेशन बेंचमार्किंग और साथी-शिक्षण मंचों के माध्यम से संगठनों में प्रथाओं का आदान-प्रदान → कार्यस्थल और कॉर्पोरेट प्रथाओं में सुधार, जिससे महिला उद्यमियों की पूँजी और कौशल तक पहुँच बढ़े → महिला उद्यमिता में वृद्धि, जिससे रोज़गार सृजन और आर्थिक सहभागिता बढ़े
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्टैंड-अप इंडिया (Stand-Up India) योजना का लक्ष्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला उद्यमियों को ऋण सुविधा उपलब्ध कराना है।
2. इस योजना के अंतर्गत ग्रीनफ़ील्ड उद्यमों के लिए विनिर्माण, सेवा या व्यापार क्षेत्र में ऋण दिए जाते हैं।
3. इस योजना का प्रशासनिक नियंत्रण नीति आयोग (NITI Aayog) के पास है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: स्टैंड-अप इंडिया (2016) अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और महिला उधारकर्ताओं को ऋण सुविधा देती है। कथन 2 सही है: योजना में ग्रीनफ़ील्ड उद्यमों के लिए विनिर्माण, सेवा और व्यापार क्षेत्र में ऋण दिए जाते हैं। कथन 3 गलत है: इसका प्रशासन वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (Department of Financial Services) के अधीन है, नीति आयोग के अधीन नहीं।
Q2. निम्नलिखित में दी गई अभिकथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): संविधान राज्य को महिलाओं के लिए विशेष उपबंध बनाने की अनुमति देता है।
कारण (R): अनुच्छेद 15(3) के अंतर्गत बनाए गए ऐसे उपबंध अनुच्छेद 15(1) में निहित विभेद-निषेध के सामान्य नियम के अपवाद माने जाते हैं।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — अनुच्छेद 15(3) राज्य को महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष उपबंध बनाने की शक्ति देता है, इसलिए (A) सही है। यह उपबंध अनुच्छेद 15(1) के विभेद-निषेध के सामान्य नियम का अपवाद है, इसलिए (R) भी सही है और यही (A) की सही व्याख्या है। अनुच्छेद 15(1) लिंग के आधार पर विभेद को रोकता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ तमिलनाडु में पंजीकृत 16,000 से अधिक स्टार्टअप में से लगभग 50.8 प्रतिशत का नेतृत्व महिलाओं के हाथ में होने का आँकड़ा सामने आया है। इस उपलब्धि को महिला उद्यमिता के संवैधानिक और नीतिगत परिप्रेक्ष्य में रखकर समीक्षा कीजिए। साथ ही यह भी स्पष्ट कीजिए कि क्या केवल पंजीकरण या नेतृत्व के आँकड़े महिला उद्यमियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित कर सकते हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर संरचना (मॉडल उत्तर के बिंदु):
1. भूमिका: तमिलनाडु के स्टार्टअप ईकोसिस्टम पर StartupTN के अध्यक्ष का कथन (16,000 से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप, 50.8 प्रतिशत महिला-नेतृत्व वाले) और ‘बेस्ट ऑफ बेस्ट’ सम्मेलन 2026 में ‘Circle of Inclusive Cultures’ की शुरुआत का उल्लेख।
2. संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 14 (विधि के समक्ष समानता); अनुच्छेद 15(1) और 15(3) (विभेद-निषेध और महिलाओं के लिए विशेष उपबंध की शक्ति); अनुच्छेद 39(क) (पुरुषों और महिलाओं को समान रूप से पर्याप्त जीविका का अधिकार, राज्य नीति का निदेशक तत्व)।
3. नीतिगत और विधिक ढाँचा: स्टार्टअप इंडिया (2016, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत DPIIT मान्यता); स्टैंड-अप इंडिया (2016, महिला और अनुसूचित वर्ग उधारकर्ता); मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम, 2017 (26 सप्ताह का वेतन सहित मातृत्व अवकाश); कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (आंतरिक शिकायत समिति का प्रावधान)।
4. ‘केवल आँकड़ों की सीमा’ पर तर्क: ‘महिला-नेतृत्व’ की परिभाषा और पंजीकृत इकाइयों तथा कुल स्टार्टअप के बीच अंतर; राज्य-स्तरीय आँकड़ों का राष्ट्रीय तुलना में सीमित होना; सफलता के बजाय उद्यमों के आकार, टिकाऊपन और लाभप्रदता का मूल्यांकन आवश्यक।
5. ढाँचागत प्रश्न (अध्यक्ष के कथन का केंद्र): पूंजी और संपार्श्विक तक पहुँच; क्रेच, लचीले कार्य-समय और सुरक्षित परिवहन जैसी सुविधाएँ; कौशल और नेटवर्क तक पहुँच; ‘कुछ भूमिकाएँ किसी एक लिंग के लिए हैं’ जैसी सामाजिक धारणाओं का प्रभाव।
6. संस्थागत पहल: ‘Circle of Inclusive Cultures’ जैसी सहकर्मी-शिक्षण पहल, Best Companies for Women in India जैसे बेंचमार्क, और पुरुष सहयोगियों के लिए Male Ally Legacy Award की भूमिका; सरकारी नीति और निजी पहल के बीच संतुलन।
7. संतुलित दृष्टिकोण और निष्कर्ष: आँकड़े सकारात्मक संकेत हैं, पर वास्तविक समानता के लिए अवसर, पूंजी-पहुँच, सुरक्षा और कार्य-संस्कृति में बदलाव आवश्यक है। निष्कर्ष में ‘समान अवसर’ को परिणाम-आधारित मापदंडों से जोड़ना।
स्रोत: The Hindu
Tamil Nadu PCS (TNPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: तमिलनाडु में स्टार्टअप्स के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- A. तमिलनाडु में 50% से अधिक स्टार्टअप्स का नेतृत्व पुरुषों द्वारा किया जाता है।
- B. तमिलनाडु में 50% से अधिक स्टार्टअप्स का नेतृत्व महिलाओं द्वारा किया जाता है।
- C. तमिलनाडु में स्टार्टअप्स का नेतृत्व केवल सरकारी अधिकारियों द्वारा किया जाता है।
- D. तमिलनाडु में स्टार्टअप्स का नेतृत्व विदेशी निवेशकों द्वारा किया जाता है।
उत्तर: B. तमिलनाडु में 50% से अधिक स्टार्टअप्स का नेतृत्व महिलाओं द्वारा किया जाता है। — StartupTN के अध्यक्ष के अनुसार, तमिलनाडु में 50% से अधिक स्टार्टअप्स का नेतृत्व महिलाएं करती हैं।
Mains: तमिलनाडु में महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स की बढ़ती संख्या राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास में कैसे योगदान दे सकती है? चर्चा करें।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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