06 Nov अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं की लंबित स्थिति की समीक्षा
✎ कल्याणकारी योजनाओं में लाभ की समयबद्धता ही उनकी वास्तविक सफलता है; बजट पुनर्विनियोजन लंबित देयों का तात्कालिक उपाय हो सकता है, पर स्थायी समाधान प्रशासनिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण और नियमित समीक्षा में है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — राजनीति एवं शासन (अल्पसंख्यक अधिकार, अनुच्छेद 29 और 30; राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग) | GS Paper II — शासन (कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और प्रशासनिक सुधार) | GS Paper II — संघवाद (राज्य सरकार की योजनाएँ और केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध)
- Prelims: अनुच्छेद 29 और 30 (अल्पसंख्यक हितों का संरक्षण और शिक्षा संस्थान स्थापित करने का अधिकार), राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992, अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदाय (मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन), अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय (स्थापना वर्ष 2006), अनुच्छेद 266 (भारत की संचित निधि और राज्य की संचित निधि), अनुच्छेद 204 और 205 (विनियोजन विधेयक और अनुपूरक, अतिरिक्त तथा अधिक अनुदान), अनुच्छेद 282 (संघ या राज्य द्वारा सार्वजनिक प्रयोजन हेतु अनुदान), हज समिति अधिनियम, 2002
- Essay: समावेशी विकास के लिए अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं की प्रभावशीलता, कल्याणकारी योजनाओं में विलंब: प्रशासनिक सुधार और लाभार्थी-केंद्रित शासन की आवश्यकता
त्वरित पुनरावृत्ति: कल्याणकारी योजनाओं में लाभ की समयबद्धता ही उनकी वास्तविक सफलता है; बजट पुनर्विनियोजन लंबित देयों का तात्कालिक उपाय हो सकता है, पर स्थायी समाधान प्रशासनिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण और नियमित समीक्षा में है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
तेलंगाना राज्य में उप मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की कई योजनाओं की स्थिति की समीक्षा के लिए विधायकों और अधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति प्राप्त न होने की शिकायत, राज्य-वित्तपोषित छात्रवृत्ति योजना का प्रस्ताव, ट्यूशन फीस प्रतिपूर्ति (Reimbursement of Tuition Fee) और मेंटेनेंस फीस प्रतिपूर्ति (Maintenance Fee Reimbursement) योजनाओं के लंबित भुगतान, लंबित आवेदनों की प्राथमिकता, मुख्यमंत्री विदेश छात्रवृत्ति योजना (Chief Minister’s Overseas Scholarship Scheme) की स्थिति और शादी मुबारक योजना (Shaadi Mubarak Scheme) के आवेदनों के सत्यापन व स्वीकृति में देरी पर चर्चा हुई। इसके साथ ही शादी मुबारक योजना की अधिशेष निधि को ट्यूशन फीस और मेंटेनेंस फीस प्रतिपूर्ति योजनाओं के लिए पुनर्विनियोजित करने का प्रस्ताव तथा चालू वित्तीय वर्ष में ट्यूशन फीस प्रतिपूर्ति के बजट आवंटन में कमी की चिंता भी उठी। पुराने शहर (Old City) में लंबित विकास कार्यों की विस्तृत जाँच और हज हाउस के शिलान्यास की योजना की घोषणा की गई, साथ ही अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कामकाज में सुधार का आश्वासन दिया गया।
पृष्ठभूमि
- संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 29 अल्पसंख्यकों की विशिष्ट भाषा, लिपि और संस्कृति के संरक्षण का अधिकार देता है, जबकि अनुच्छेद 30 शिक्षा संस्थान स्थापित करने और चलाने का अधिकार देता है। कल्याण योजनाएँ इन्हीं मूल्यों के सामाजिक-आर्थिक पक्ष को साकार करती हैं।
- संस्थागत ढाँचा: राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के अंतर्गत राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की वैधानिक स्थापना हुई। केंद्र में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय वर्ष 2006 में अस्तित्व में आया और इसके अधीन छात्रवृत्ति व कौशल विकास जैसी योजनाएँ चलती हैं।
- वित्तीय ढाँचा: राज्य की योजनाओं का व्यय राज्य की संचित निधि से होता है (अनुच्छेद 266)। विधानमंडल की स्वीकृति के बिना व्यय नहीं हो सकता, इसलिए बजट के प्रावधान, अनुपूरक अनुदान और पुनर्विनियोजन की प्रक्रिया योजनाओं के भुगतान को सीधे प्रभावित करती है।
- प्रशासनिक चुनौती: छात्रवृत्ति और प्रतिपूर्ति जैसी योजनाओं में लाभार्थी के आवेदन, सत्यापन, स्वीकृति और भुगतान के कई चरण होते हैं। किसी एक चरण में देरी से लंबित देयों का संचय होता है, जिसे मूल्यांकन में ‘योजना की पेंडेंसी’ कहा जाता है।
- अन्य संदर्भ: सरकार द्वारा हज यात्रा से जुड़ी सुविधाओं के लिए हज हाउस जैसे भवन बनाए जाते हैं। केंद्रीय स्तर पर हज यात्रा का संचालन हज समिति अधिनियम, 2002 के प्रावधानों से होता है।
अल्पसंख्यक कल्याण योजनाएँ और बजट पुनर्विनियोजन क्या है?
- अल्पसंख्यक कल्याण योजनाएँ शिक्षा, छात्रवृत्ति, कौशल और सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण के लिए चलाई जाती हैं। भारत में अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों में मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन सम्मिलित हैं।
- प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति कक्षा एक से दसवीं तक की शिक्षा के लिए दी जाती है, जबकि प्रतिपूर्ति योजनाएँ उच्च शिक्षा में ट्यूशन और रखरखाव व्यय की भरपाई करती हैं। दोनों का लाभ समय पर मिलना शिक्षा में निरंतरता के लिए आवश्यक है।
- पुनर्विनियोजन (Reappropriation) का अर्थ है, स्वीकृत बजट की कुल राशि को बदले बिना किसी एक मद की बचत को दूसरी मद में स्थानांतरित करना। यह सामान्यतः कार्यपालिका के स्तर पर वित्त विभाग की सहमति से होता है, परंतु इसकी सीमाएँ और नियम राज्य के वित्तीय नियमों से तय होते हैं।
- अनुपूरक, अतिरिक्त और अधिक अनुदान (Supplementary, Additional or Excess Grants) की माँग विधानमंडल के समक्ष रखी जाती है (अनुच्छेद 205)। इसलिए कुल आवंटन बढ़ाने और घटाने के निर्णय में विधायी प्रक्रिया की भूमिका होती है, जबकि एक मद से दूसरी मद में धन लगाने का निर्णय अपेक्षाकृत त्वरित होता है।
- बजट कटौती और लंबित देयों का संबंध: यदि किसी योजना का बजट घटाया जाता है या पूर्व-वर्षों के देय चुकाए नहीं जाते, तो नए वर्ष में लाभार्थियों की कतार बढ़ती है। यही कारण है कि लंबित आवेदनों की प्राथमिकता तय करना और बजट को वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप रखना आवश्यक होता है।
- सुधार के उपाय: आवेदनों के डिजिटल सत्यापन, समय-सीमा का निर्धारण, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer) द्वारा भुगतान और नियमित समीक्षा बैठकें प्रशासनिक पेंडेंसी को कम करने में सहायक हैं।
- संघवाद के संदर्भ में, राज्य की योजनाएँ राज्य के बजट से चलती हैं, किंतु केंद्र प्रायोजित योजनाओं और अनुच्छेद 282 के अंतर्गत दिए गए अनुदानों से भी राज्य को सहायता मिलती है। दोनों स्रोतों का समन्वय योजनाओं की निरंतरता तय करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| लंबितता (Pendency) की समीक्षा | राज्य सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की कई योजनाओं में लाभार्थियों तक सहायता न पहुँचने की स्थिति की व्यवस्थित जाँच, जिसमें विधायकों और अधिकारियों की संयुक्त बैठक हुई। |
| प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति (Pre-Matric Scholarship) | अल्पसंख्यक छात्रों को प्राप्ति न होने का मुद्दा उठा। साथ ही राज्य-वित्तपोषित छात्रवृत्ति योजना का प्रस्ताव चर्चा में रहा, जिससे राज्य की अपनी शैक्षिक सहायता नीति का विस्तार संभव होता है। |
| ट्यूशन शुल्क प्रतिपूर्ति योजना (Reimbursement of Tuition Fee – RTF) और रखरखाव शुल्क प्रतिपूर्ति योजना (Maintenance Fee – MTF) | इन योजनाओं के बकाया भुगतान और लंबित आवेदनों की प्राथमिकता तय करना उच्च शिक्षा में आर्थिक बाधाएँ दूर करने से जुड़ा है। |
| शादी मुबारक योजना (Shaadi Mubarak Scheme) | आवेदनों के सत्यापन और स्वीकृति में देरी दर्ज हुई। इस योजना की अधिशेष निधि को RTF और MTF में पुनर्विनियोजन (Reappropriation) करने का प्रस्ताव आया। |
| बजट आवंटन में कटौती | चालू वित्तीय वर्ष में RTF के लिए बजट आवंटन घटने से योजना के वित्तपोषण और लाभार्थियों की अपेक्षाओं के बीच अंतर की चिंता उभरी। |
महत्व
प्रशासनिक और शासकीय
- लंबित आवेदनों और देरी की समीक्षा से लोक सेवा वितरण में जवाबदेही तय होती है और नीति-क्रियान्वयन की कमियाँ सामने आती हैं।
- विभागीय सुधारों का आश्वासन शासन की दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक नीतिगत संकेत है।
वित्तीय
- अधिशेष निधि का पुनर्विनियोजन यह दर्शाता है कि बजट में एक मद की बचत को दूसरी मद की आवश्यकता के लिए उपयोग किया जा सकता है, बशर्ते विधानमंडल की स्वीकृति हो।
- बजट आवंटन में कटौती और बकाया भुगतान के बीच संतुलन राजकोषीय अनुशासन और सामाजिक व्यय की प्राथमिकता, दोनों से जुड़ा प्रश्न है।
सामाजिक और शैक्षिक
- छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति से उच्च और तकनीकी शिक्षा तक आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की पहुँच बढ़ती है।
- समयबद्ध भुगतान से शिक्षा की निरंतरता बनी रहती है और ड्रॉपआउट की संभावना घटती है।
संघीय और संवैधानिक
- अल्पसंख्यक कल्याण राज्य के अपने बजट से संचालित योजनाओं द्वारा भी लागू होता है, जिससे राज्य की नीतिगत स्वायत्तता स्पष्ट होती है।
- केंद्र द्वारा प्रायोजित योजनाओं और राज्य की अपनी योजनाओं के बीच समन्वय इस मामले में भी प्रासंगिक है।
शहरी विकास और बुनियादी ढाँचा
- पुराने शहर के लंबित विकास कार्यों और नए हज हाउस की आधारशिला जैसे कदम शहरी बुनियादी ढाँचे और सामुदायिक सुविधाओं से संबंधित हैं।
चुनौतियाँ
1. लंबितता और सत्यापन में देरी
- आवेदनों की जाँच और स्वीकृति में देरी से पात्र लाभार्थी समय पर सहायता से वंचित रहते हैं।
- प्राथमिकता तय किए बिना बकाया भुगतान बढ़ता है और प्रशासनिक बोझ गहराता है।
- डिजिटल निगरानी और समयसीमा निर्धारण की व्यवस्था न होने पर जवाबदेही कमजोर रहती है।
यूपीएससी लिंक: शासन-प्रशासन में सुधार और लोक सेवा वितरण (GS-2)
2. बजट आवंटन और पुनर्विनियोजन की प्रक्रिया
- बजट आवंटन में कटौती से योजना की वास्तविक क्षमता घटती है, भले ही लाभार्थियों की संख्या बनी रहे।
- अधिशेष निधि का पुनर्विनियोजन विधानमंडल की स्वीकृति और वित्तीय नियमों के दायरे में होना चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
- अनुपूरक अनुदान पर निर्भरता बढ़ने से बजट की भविष्यवाणीयोग्यता पर असर पड़ता है।
यूपीएससी लिंक: सार्वजनिक वित्त, बजट प्रक्रिया और राजकोषीय प्रबंधन (GS-3)
3. लाभार्थियों तक सूचना और पहुँच
- योजनाओं की जानकारी और आवेदन प्रक्रिया की जटिलता के कारण कई पात्र छात्र और परिवार लाभ से दूर रह जाते हैं।
- अल्पसंख्यक छात्रों की छात्रवृत्ति प्राप्ति में बाधा से शैक्षिक असमानता बढ़ने का खतरा रहता है।
यूपीएससी लिंक: दुर्बल वर्गों के लिए सामाजिक न्याय की योजनाएँ (GS-2)
4. केंद्र और राज्य योजनाओं में समन्वय
- केंद्र की छात्रवृत्ति योजनाओं और राज्य की योजनाओं के बीच दोहराव या अंतराल से संसाधनों का कुशल उपयोग प्रभावित होता है।
- राज्य-वित्तपोषित योजना का विस्तार करते समय केंद्र की समान योजनाओं के साथ तालमेल आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: केंद्र-राज्य संबंध और सहकारी संघवाद (GS-2)
5. शहरी विकास कार्यों में विलंब
- पुराने शहर के क्षेत्रों में लंबित विकास कार्यों से बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी रहती है।
- निरीक्षण और परियोजना निगरानी की नियमित व्यवस्था के बिना कार्यों में देरी दोहराई जाती है।
यूपीएससी लिंक: शहरीकरण, बुनियादी ढाँचा और सार्वजनिक सेवाएँ (GS-1 और GS-3)
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| आवेदनों की लंबितता | सत्यापन और स्वीकृति में देरी से पात्र छात्र और परिवार समय पर सहायता से वंचित रहते हैं। |
| बजट आवंटन में कटौती | RTF जैसी योजनाओं की वास्तविक क्षमता घटती है और बकाया भुगतान बढ़ता है। |
| अधिशेष निधि का पुनर्विनियोजन | इसके लिए विधानमंडल की स्वीकृति और वित्तीय नियमों का पालन आवश्यक है; अन्यथा पारदर्शिता पर प्रश्न उठते हैं। |
| छात्रवृत्ति की प्राप्ति में बाधा | अल्पसंख्यक छात्रों तक सहायता न पहुँचने से शैक्षिक असमानता की स्थिति बनी रहती है। |
| केंद्र और राज्य योजनाओं में तालमेल | दोहराव या अंतराल से संसाधनों का अपव्यय और लाभार्थियों में भ्रम की स्थिति बन सकती है। |
| शहरी विकास कार्यों में विलंब | पुराने शहर में लंबित कार्यों से बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी रहती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- ट्यूशन शुल्क प्रतिपूर्ति योजना (Reimbursement of Tuition Fee – RTF)
- रखरखाव शुल्क प्रतिपूर्ति योजना (Maintenance Fee – MTF)
- शादी मुबारक योजना (Shaadi Mubarak Scheme)
- मुख्यमंत्री विदेश छात्रवृत्ति योजना (Chief Minister’s Overseas Scholarship Scheme)
- प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति (Pre-Matric Scholarship)
आगे की राह
- लंबित आवेदनों का वर्गीकरण कर प्राथमिकता तय की जाए और सत्यापन के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की जाए।
- आवेदन से स्वीकृति और भुगतान तक की प्रक्रिया को डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली से जोड़ा जाए, ताकि प्रगति सार्वजनिक रूप से दिखाई दे।
- बकाया भुगतान का चरणबद्ध कार्यक्रम बनाकर उसकी नियमित समीक्षा विधानमंडल की समिति के समक्ष की जाए।
- अधिशेष निधि के पुनर्विनियोजन में वित्तीय नियमों और विधानमंडल की स्वीकृति का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए।
- RTF और MTF जैसी योजनाओं के लिए बजट आवंटन का आकलन लाभार्थियों की वास्तविक संख्या के आधार पर किया जाए।
- छात्रवृत्ति की जानकारी को विद्यालयों, महाविद्यालयों और अल्पसंख्यक संस्थाओं के माध्यम से व्यापक रूप से प्रसारित किया जाए।
- राज्य-वित्तपोषित छात्रवृत्ति योजना को केंद्र की समान योजनाओं के साथ तालमेल में रखकर दोहराव से बचा जाए।
- पुराने शहर के लंबित विकास कार्यों का निरीक्षण और परियोजना-वार निगरानी नियमित रूप से की जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
अल्पसंख्यक कल्याण · अनुच्छेद 29 और 30 (Articles 29 and 30) · अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान · पूर्व-मैट्रिक छात्रवृत्ति (Pre-Matric Scholarship) · शिक्षा ऋण और ट्यूशन शुल्क प्रतिपूर्ति (Reimbursement of Tuition Fee – RTF) · विवाह सहायता योजना · अनुदान का पुनर्विनियोजन (Re-appropriation) · अनुपूरक अनुदान (Supplementary Grant) · प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer – DBT) · सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (Public Financial Management System – PFMS) · राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (National Commission for Minorities) · सच्चर समिति रिपोर्ट (Sachar Committee Report) · समावेशी विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 14: सभी के लिए विधि के समक्ष समता
- अनुच्छेद 15: धर्म के आधार पर भेदभाव का निषेध
- अनुच्छेद 205: पूरक, अतिरिक्त और अधिक अनुदान की प्रक्रिया
- अनुच्छेद 282: राज्य द्वारा सार्वजनिक प्रयोजन हेतु अनुदान
अवधारणा प्रवाह
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की योजनाओं में आवेदनों का लंबित रहना और सत्यापन में देरी → छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान न होना या बकाया बढ़ना → चालू वित्तीय वर्ष में RTF के बजट आवंटन में कटौती से दबाव बढ़ना → शादी मुबारक योजना की अधिशेष निधि के पुनर्विनियोजन पर विचार और विधानमंडल की स्वीकृति की आवश्यकता → प्राथमिकता-निर्धारण, प्रक्रिया-सुधार और बजट समन्वय से लाभार्थियों तक सहायता की समयबद्ध पहुँच
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 29(1) भारत के उस नागरिक वर्ग को, जिसकी अपनी विशिष्ट भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसके संरक्षण का अधिकार देता है।
2. संविधान का अनुच्छेद 30(1) धार्मिक और भाषायी अल्पसंख्यकों को अपनी शैक्षिक संस्थाएँ स्थापित और संचालित करने का अधिकार देता है।
3. अनुच्छेद 46 में वर्णित राज्य के नीति निदेशक तत्व मौलिक अधिकार के रूप में न्यायालय में प्रवर्तनीय हैं।
4. अनुच्छेद 350B के अंतर्गत भाषायी अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी चार
उत्तर: केवल तीन — कथन 1, 2 और 4 सही हैं। अनुच्छेद 29(1) सांस्कृतिक संरक्षण और अनुच्छेद 30(1) शैक्षिक संस्थाओं के अधिकार से संबंधित है, जबकि अनुच्छेद 350B में भाषायी अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी का प्रावधान राष्ट्रपति की नियुक्ति से जुड़ा है। कथन 3 गलत है, क्योंकि नीति निदेशक तत्व न्यायालय में प्रवर्तनीय नहीं हैं (अनुच्छेद 37)।
Q2. अभिकथन (A): राज्य सरकार किसी स्वीकृत अनुदान के भीतर एक मद की राशि दूसरी मद में पुनर्विनियोजित कर सकती है, परंतु बजट से अधिक व्यय के लिए विधानमंडल की स्वीकृति आवश्यक होती है।
कारण (R): संविधान का अनुच्छेद 205 राज्य विधानमंडल के समक्ष अनुपूरक, अतिरिक्त और अधिक अनुदानों की माँगें प्रस्तुत करने और उनकी स्वीकृति से संबंधित प्रक्रिया का प्रावधान करता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — पुनर्विनियोजन स्वीकृत अनुदान के भीतर कार्यपालिका द्वारा किया जाने वाला समायोजन है, जबकि बजट से अधिक व्यय हेतु अनुपूरक अनुदान की माँग अनुच्छेद 205 के अंतर्गत विधानमंडल के समक्ष रखी जाती है। कारण (R) इसी विधिक प्रक्रिया को स्पष्ट करता है, इसलिए वह (A) की सही व्याख्या है।
Q3. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- यह संविधान के अनुच्छेद 338 के अंतर्गत स्थापित एक संवैधानिक निकाय है।
- यह राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के अंतर्गत गठित एक सांविधिक निकाय है।
- इसके अध्यक्ष की नियुक्ति भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा की जाती है।
- यह अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय का एक अंग है और इसका स्वतंत्र विधिक अस्तित्व नहीं है।
उत्तर: यह राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के अंतर्गत गठित एक सांविधिक निकाय है। — राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की स्थापना राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के अंतर्गत हुई है, इसलिए यह संवैधानिक नहीं बल्कि सांविधिक निकाय है। अनुच्छेद 338 अनुसूचित जातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग से संबंधित है। आयोग का स्वतंत्र विधिक अस्तित्व है, और इसके अध्यक्ष की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राज्य स्तर पर अल्पसंख्यक कल्याण योजनाएँ शिक्षा और विवाह सहायता जैसे क्षेत्रों में अवसरों के विस्तार का साधन हैं, किंतु लंबित आवेदन, बजट आवंटन में कटौती और अनुदान के पुनर्विनियोजन जैसे प्रश्न इनकी प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं। संविधान के अनुच्छेद 29, 30 और 46 के परिप्रेक्ष्य में इन योजनाओं की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि बजट-प्रबंधन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कौन-से सुधार लाभार्थियों तक समय पर सहायता पहुँचाने में सहायक हो सकते हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर संरचना (मॉडल उत्तर के बिंदु):
1. संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 14 (विधि के समक्ष समानता) और अनुच्छेद 15(1) (धर्म के आधार पर भेदभाव का निषेध); अनुच्छेद 29(1) (विशिष्ट संस्कृति और भाषा का संरक्षण); अनुच्छेद 30(1) (अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन का अधिकार); अनुच्छेद 46 (दुर्बल वर्गों के शैक्षिक हितों का संवर्धन, नीति निदेशक तत्व के रूप में)। स्पष्ट करें कि अनुच्छेद 46 में अल्पसंख्यक शब्द नहीं है, इसलिए शिक्षा-सहायता का सामान्य आधार समता और सामाजिक न्याय है।
2. संस्थागत ढाँचा: राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के अंतर्गत सांविधिक निकाय); अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय (वर्ष 2006 में पृथक मंत्रालय के रूप में गठित); राज्य स्तर पर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और उसकी योजनाओं का क्रियान्वयन।
3. नीतिगत और आँकड़ात्मक संदर्भ: सच्चर समिति रिपोर्ट (2006) द्वारा मुस्लिम समुदाय की शिक्षा और आर्थिक स्थिति में पिछड़ेपन का उल्लेख; रंगनाथ मिश्र आयोग (2007) की सिफारिशें; केंद्र की पूर्व-मैट्रिक और उत्तर-मैट्रिक छात्रवृत्तियाँ, जिनसे राज्य योजनाओं के डिज़ाइन की तुलना की जा सकती है।
4. बजट और वित्तीय प्रक्रिया: संचित निधि से व्यय (अनुच्छेद 266); अनुदान की माँगें और अनुपूरक अनुदान (अनुच्छेद 204 और 205); वार्षिक वित्तीय विवरण (अनुच्छेद 202, 112 का राज्य-स्तरीय समकक्ष); पुनर्विनियोजन की प्रकृति (स्वीकृत अनुदान के भीतर कार्यपालिका का समायोजन, वित्तीय नियमों के अधीन) और इसकी पारदर्शिता पर प्रश्न; राजकोषीय उत्तरदायित्व ढाँचा और बकाया देयताओं (pending liabilities) का प्रबंधन।
5. सुधार का माध्यम: प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के माध्यम से भुगतान का ट्रैकिंग; आवेदनों की समयबद्ध सत्यापन-प्रक्रिया और प्राथमिकता-क्रम का स्पष्ट मानदंड; बजट में वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप आवंटन; नियमित समीक्षा और सार्वजनिक प्रतिवेदन।
6. न्यायिक दृष्टिकोण: टी.एम.ए. पाई फाउंडेशन बनाम कर्नाटक राज्य (2002) और सेंट स्टीफन्स कॉलेज बनाम दिल्ली विश्वविद्यालय (1992) के निर्णयों से अल्पसंख्यक संस्थाओं के अधिकारों और राज्य के नियामक हस्तक्षेप की सीमा का संतुलन।
7. विभिन्न मत: (क) लक्षित योजनाएँ बनाम सार्वभौमिक योजनाएँ: लक्षित योजनाएँ वास्तविक वंचना को संबोधित करती हैं, पर समुदाय-आधारित वर्गीकरण पर समानता के सिद्धांत की दृष्टि से प्रश्न उठते हैं; (ख) राजकोषीय अनुशासन बनाम सामाजिक न्याय: बजट-कटौती को राजकोषीय संतुलन से जोड़ा जाता है, परंतु इससे पात्र विद्यार्थियों की निरंतरता प्रभावित होती है; (ख) डिजिटल दक्षता बनाम डिजिटल बहिष्करण: DBT से रिसाव घटता है, पर तकनीकी पहुँच की कमी वाले लाभार्थी बाहर रह सकते हैं।
8. निष्कर्ष: संवैधानिक दायित्व और योजनागत क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटने के लिए बजट-प्रबंधन, समयबद्ध सत्यापन और जवाबदेही-तंत्र को एक साथ सुदृढ़ करना आवश्यक है।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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