10 Oct पीएम धन-धान्य कृषि योजना: किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ, जानिए पूरा प्लान
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय | GS Paper III — कृषि मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न- सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन तथा संबंधित विषय एवं बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिये ई-प्रौद्योगिकी | GS Paper II — केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ एवं इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय
- Prelims: प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY), कृषि क्षेत्र, किसानों की आय, कृषि उत्पादकता, खाद्य सुरक्षा, सरकारी योजनाएँ, ग्रामीण विकास, कृषि ऋण
- Essay: भारत में कृषि संकट और किसानों की आय दोगुनी करने की चुनौतियाँ, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में सरकारी योजनाओं की भूमिका और प्रभाव
पृष्ठभूमि
- भारत में कृषि क्षेत्र एक महत्वपूर्ण आर्थिक आधार है, जो देश की लगभग आधी आबादी को रोज़गार प्रदान करता है।
- किसानों को अक्सर जलवायु परिवर्तन, बाज़ार की अस्थिरता और अपर्याप्त बुनियादी ढाँचे जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
- सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने और कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए कई पहलें की हैं, जैसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)।
- कृषि उत्पादकता में वृद्धि और किसानों के जीवन स्तर में सुधार के लिए व्यापक और एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
- खाद्य सुरक्षा (Food Security) सुनिश्चित करने और कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भी कृषि क्षेत्र में नवाचार और निवेश आवश्यक है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) | किसानों को सीधे वित्तीय सहायता, बिचौलियों की भूमिका समाप्त। |
| फसल विविधीकरण प्रोत्साहन | किसानों को पारंपरिक फसलों के अलावा अन्य फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना, जिससे आय में वृद्धि हो। |
| कृषि अवसंरचना विकास | भंडारण, कोल्ड चेन और प्रसंस्करण सुविधाओं में सुधार, फसल कटाई के बाद के नुकसान को कम करना। |
| बाजार पहुँच में सुधार | किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराना, जिससे उन्हें उचित मूल्य मिल सके। |
| जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियाँ | जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने के लिए टिकाऊ कृषि तकनीकों को बढ़ावा देना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- किसानों की आय में वृद्धि करके ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करना।
- कृषि क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना, जिससे रोजगार सृजन हो सके।
- खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना।
सामाजिक महत्व
- किसानों के जीवन स्तर में सुधार और ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन को कम करना।
- महिला किसानों को सशक्त बनाना और कृषि में उनकी भागीदारी को बढ़ाना।
- पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना और ग्रामीण आबादी के स्वास्थ्य में सुधार करना।
पर्यावरणीय महत्व
- टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देकर मृदा स्वास्थ्य और जल संरक्षण में सुधार करना।
- रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग को कम करके पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करना।
- जैव विविधता का संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करना।
चुनौतियाँ
1. छोटे और सीमांत किसानों तक पहुँच
- छोटे और सीमांत किसानों को योजना का पूरा लाभ पहुँचाना एक चुनौती है।
- जागरूकता की कमी और दस्तावेज़ीकरण की जटिलताएँ बाधा बन सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: कृषि क्षेत्र की चुनौतियाँ, सरकारी नीतियाँ
2. बुनियादी ढाँचे का अभाव
- ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त भंडारण, परिवहन और प्रसंस्करण सुविधाओं का अभाव है।
- यह किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने से रोकता है।
यूपीएससी लिंक: कृषि विपणन, अवसंरचना विकास
3. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव
- अनियमित मौसम पैटर्न, सूखा और बाढ़ कृषि उत्पादकता को प्रभावित करते हैं।
- योजना को इन चुनौतियों का सामना करने के लिए लचीला होना चाहिए।
यूपीएससी लिंक: जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन
4. बाजार संपर्क और मूल्य अस्थिरता
- किसानों को अक्सर अपनी उपज बेचने के लिए उचित बाजार नहीं मिल पाता है।
- कृषि उत्पादों की कीमतों में अस्थिरता किसानों की आय को प्रभावित करती है।
यूपीएससी लिंक: कृषि विपणन, मूल्य स्थिरीकरण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण | अधूरे और त्रुटिपूर्ण भूमि रिकॉर्ड योजना के कार्यान्वयन में बाधा डाल सकते हैं। |
| तकनीकी पहुँच | ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और स्मार्टफोन की सीमित पहुँच DBT को प्रभावित कर सकती है। |
| अंतर-राज्यीय समन्वय | राज्यों के बीच प्रभावी समन्वय के बिना योजना का समग्र प्रभाव कम हो सकता है। |
| ऋणग्रस्तता | किसानों की उच्च ऋणग्रस्तता उन्हें नई कृषि पद्धतियों को अपनाने से रोक सकती है। |
| कृषि अनुसंधान और विस्तार | नवीन तकनीकों को किसानों तक पहुँचाने में अनुसंधान और विस्तार सेवाओं की कमी। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN)
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)
- कृषि अवसंरचना कोष (AIF)
- राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY)
आगे की राह
- योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाए।
- कृषि अवसंरचना के विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाए।
- कृषि उत्पादों के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय बाजार विकसित किया जाए।
- जलवायु-स्मार्ट कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाया जाए।
- किसानों को वित्तीय साक्षरता और डिजिटल कौशल प्रदान करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएँ।
- योजना के कार्यान्वयन की नियमित निगरानी और मूल्यांकन किया जाए ताकि कमियों को दूर किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना · कृषि क्षेत्र · किसानों की आय · खाद्य सुरक्षा · कृषि ऋण · फसल बीमा · कृषि अवसंरचना · जलवायु परिवर्तन · सतत कृषि · सरकारी योजनाएँ
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39’, ‘note’: ‘आजीविका के पर्याप्त साधन का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 43’, ‘note’: ‘कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48’, ‘note’: ‘कृषि और पशुपालन का संगठन’}
अवधारणा प्रवाह
किसानों को वित्तीय सहायता → कृषि निवेश में वृद्धि → उत्पादकता और आय में वृद्धि → ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्तिकरण → खाद्य सुरक्षा और पोषण में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान करना है ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके।
2. यह योजना केवल खरीफ फसलों के लिए लागू होती है, रबी फसलों के लिए नहीं।
3. योजना के तहत किसानों को कृषि उपकरण खरीदने के लिए सब्सिडी प्रदान की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है क्योंकि योजना का प्राथमिक लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह योजना आमतौर पर सभी प्रमुख फसल चक्रों को कवर करती है, न कि केवल खरीफ को। कथन 3 भी सही है क्योंकि कृषि उपकरणों पर सब्सिडी योजना का एक महत्वपूर्ण घटक है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कारक भारत में कृषि क्षेत्र के समक्ष प्रमुख चुनौती/चुनौतियाँ है/हैं?
1. जलवायु परिवर्तन और अनिश्चित मौसम पैटर्न
2. छोटे और खंडित भूमि-जोत
3. कृषि ऋण तक सीमित पहुँच
4. कृषि उत्पादों के लिए अपर्याप्त बाज़ार अवसंरचना
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — भारत में कृषि क्षेत्र कई चुनौतियों का सामना करता है। जलवायु परिवर्तन और अनिश्चित मौसम पैटर्न (जैसे सूखा और बाढ़) फसल उत्पादन को सीधे प्रभावित करते हैं। छोटे और खंडित भूमि-जोत मशीनीकरण और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने में बाधा डालते हैं। कृषि ऋण तक सीमित पहुँच किसानों को निवेश करने से रोकती है, और कृषि उत्पादों के लिए अपर्याप्त बाज़ार अवसंरचना किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने में बाधा डालती है। अतः सभी कथन सही हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) का उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि करना और कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ करना है। इस कथन के आलोक में, योजना के प्रमुख उद्देश्यों और भारतीय कृषि पर इसके संभावित प्रभावों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) के मुख्य उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाना चाहिए, जैसे प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता, कृषि अवसंरचना का विकास, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन, और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करना। इसके बाद, भारतीय कृषि पर इसके संभावित सकारात्मक प्रभावों का विश्लेषण करें, जिसमें किसानों की आय में वृद्धि, खाद्य सुरक्षा में सुधार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा और कृषि उत्पादकता में वृद्धि शामिल है। अंत में, योजना के कार्यान्वयन से जुड़ी चुनौतियों और सीमाओं का समालोचनात्मक परीक्षण करें, जैसे कि लक्षित लाभार्थियों तक पहुँच, वित्तीय स्थिरता, बाज़ार की अस्थिरता और जलवायु परिवर्तन के दीर्घकालिक प्रभाव। उत्तर में प्रासंगिक सरकारी आँकड़ों और अन्य कृषि योजनाओं का भी उल्लेख किया जा सकता है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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