गोल्लाला गुडी को राष्ट्रीय महत्व का स्थल घोषित, रामप्पा मंदिर के निकट

Gollala Gudi near Ramappa temple in Palampet declared site of national importance by ASI — labelled illustration

गोल्लाला गुडी को राष्ट्रीय महत्व का स्थल घोषित, रामप्पा मंदिर के निकट

✎ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने तेलंगाना के मुलुगु जिले के पालमपेट स्थित गोलाला गुड़ी को राष्ट्रीय महत्व का स्थल घोषित किया है। यह मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल रामप्पा मंदिर के निकट स्थित है और काकतीय काल से संबंधित है…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भारतीय विरासत और संस्कृति  |  GS Paper I — कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला  |  GS Paper III — संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और गिरावट, पर्यावरण प्रभाव आकलन
  • Prelims: गोलाला गुड़ी, रामप्पा मंदिर, काकतीय वास्तुकला, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), राष्ट्रीय महत्व के स्मारक, प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल
  • Essay: भारत की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण: चुनौतियाँ और समाधान, आधुनिक विकास के साथ प्राचीन स्मारकों का संतुलन

यह खबर चर्चा में क्यों?

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने तेलंगाना के मुलुगु जिले के पालमपेट स्थित गोलाला गुड़ी को राष्ट्रीय महत्व का स्थल घोषित किया है। यह मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल रामप्पा मंदिर के निकट स्थित है और काकतीय काल से संबंधित है, जिसमें रामप्पा मंदिर के समान वास्तुकला और निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया है।

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पृष्ठभूमि

  • गोलाला गुड़ी तेलंगाना के पालमपेट में स्थित है और काकतीय राजवंश के काल (12वीं-14वीं शताब्दी) से संबंधित है।
  • यह मंदिर रामप्पा मंदिर के समान वास्तुकला शैली को दर्शाता है, जिसमें बिना किसी बंधनकारी मोर्टार (गारे) के पत्थरों का उपयोग किया गया है।
  • रामप्पा मंदिर को 2021 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था, और उस समय एक शर्त यह थी कि इसे अकेले न देखकर, बल्कि गोलाला गुड़ी जैसे आस-पास के मंदिरों सहित एक समग्र इकाई के रूप में देखा जाए।
  • राष्ट्रीय महत्व का स्थल घोषित होने से पहले, गोलाला गुड़ी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में था, जिसके संरक्षण के लिए ASI ने लिडार (Lidar) के साथ साइट का दस्तावेजीकरण किया और बाड़ व मचान लगाए थे।
  • राज्य सरकार ने ASI को 16 एकड़ भूमि सौंपी है, जिससे रामप्पा, शिव मंदिर और गोलाला गुड़ी को एक ही प्रवेश द्वार के माध्यम से पहुँचा जा सके।
  • राष्ट्रीय महत्व के स्मारक घोषित होने के बाद, ASI ऐसे स्थलों के संरक्षण, रखरखाव और उन तक पहुँच को विनियमित करने का कार्य करता है।

राष्ट्रीय महत्व के स्मारक और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI)

  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन एक प्रमुख संगठन है। इसका मुख्य कार्य पुरातात्विक अनुसंधान और राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और परिरक्षण का है।
  • ASI की स्थापना 1861 में अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा की गई थी, जिन्हें ‘भारतीय पुरातत्व का जनक’ माना जाता है।
  • ASI देश भर में 3,600 से अधिक प्राचीन स्मारकों, पुरातात्विक स्थलों और राष्ट्रीय महत्व के अवशेषों का प्रबंधन करता है।
  • इन स्थलों में मंदिर, मस्जिद, चर्च, मकबरे, किले, गुफाएँ और प्राचीन बस्तियाँ शामिल हैं, जो भारत के समृद्ध इतिहास और विविध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।
  • ASI इन स्थलों पर उत्खनन, संरक्षण, जीर्णोद्धार और रखरखाव का कार्य करता है, साथ ही जनता के लिए उनकी पहुँच और जागरूकता को भी बढ़ावा देता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
गोलाला गुड़ी मंदिर तेलंगाना के मुलुगु जिले के पालमपेट में स्थित, रामप्पा मंदिर के निकट।
राष्ट्रीय महत्व का स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा घोषित, प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत संरक्षित।
काकतीय काल रामप्पा मंदिर के समान ही काकतीय वंश के समय का है, समान स्थापत्य शैली और निर्माण सामग्री।
पुनर्निर्माण की आवश्यकता मंदिर की जीर्ण-शीर्ण अवस्था के कारण ASI द्वारा संरक्षण और पुनर्निर्माण कार्य किया जाएगा।
यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल रामप्पा मंदिर को 2021 में विश्व धरोहर स्थल घोषित करते समय गोलाला गुड़ी जैसे निकटवर्ती मंदिरों को भी समग्रता में देखने की शर्त थी।

महत्व

सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व

  • गोलाला गुड़ी मंदिर काकतीय वास्तुकला और शिल्प कौशल का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जो इस क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को दर्शाता है।
  • यह रामप्पा मंदिर के साथ मिलकर काकतीय कला और संस्कृति के अध्ययन के लिए एक व्यापक संदर्भ प्रदान करता है, जिससे इस काल की स्थापत्य कला को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।

संरक्षण एवं पर्यटन

  • राष्ट्रीय महत्व के स्थल के रूप में घोषणा से मंदिर को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा विधिवत संरक्षण और रखरखाव प्राप्त होगा, जिससे इसके क्षरण को रोका जा सकेगा।
  • रामप्पा मंदिर के निकट होने के कारण, यह पर्यटकों के लिए एक अतिरिक्त आकर्षण बनेगा, जिससे क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होगा।

विरासत प्रबंधन

  • यह घोषणा भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रबंधन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
  • यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में रामप्पा मंदिर की घोषणा के दौरान रखी गई शर्तों में से एक को पूरा करता है, जिसमें आसपास के संबंधित स्थलों को भी शामिल करने की बात कही गई थी।

चुनौतियाँ

1. संरक्षण और पुनर्निर्माण

  • मंदिर की जीर्ण-शीर्ण अवस्था को देखते हुए इसके संरक्षण और पुनर्निर्माण में अत्यधिक सावधानी और विशेषज्ञता की आवश्यकता होगी ताकि इसकी मूल स्थापत्य शैली और अखंडता बनी रहे।
  • पत्थरों के बिना किसी बंधनकारी मोर्टार के निर्माण के कारण, इसे अलग करके फिर से उसी योजना के अनुसार बनाना एक जटिल इंजीनियरिंग चुनौती है।

2. समग्र विकास और प्रबंधन

  • रामप्पा, शिव मंदिर और गोलाला गुड़ी जैसे तीनों मंदिरों को एक ही प्रवेश द्वार से सुलभ बनाने के लिए एक एकीकृत परिसर का निर्माण करना होगा, जिसमें भूमि अधिग्रहण और समन्वय संबंधी चुनौतियाँ शामिल हो सकती हैं।
  • इन स्थलों पर पर्यटकों की बढ़ती संख्या का प्रबंधन, बुनियादी ढाँचे का विकास और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करना भी एक चुनौती होगी।

3. जागरूकता और संवर्धन

  • इन स्थलों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के बारे में स्थानीय समुदायों और पर्यटकों के बीच जागरूकता बढ़ाना महत्वपूर्ण है ताकि वे संरक्षण प्रयासों में सहयोग कर सकें।
  • इन स्थलों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना ताकि अधिक से अधिक लोग इनकी यात्रा करें और इनके महत्व को समझें।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
जीर्ण-शीर्ण अवस्था मंदिर का 60% हिस्सा बरकरार है, लेकिन अन्य पत्थर क्षतिग्रस्त हैं, जिससे पुनर्निर्माण की जटिलता बढ़ जाती है।
वास्तुकला की विशिष्टता बिना किसी बंधनकारी मोर्टार के पत्थरों से निर्मित होने के कारण, इसे अलग करके फिर से बनाना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है।
एकीकृत परिसर का निर्माण रामप्पा, शिव मंदिर और गोलाला गुड़ी को एक ही प्रवेश द्वार से जोड़ने के लिए 16 एकड़ भूमि का प्रबंधन और विकास।
पर्यटन का दबाव बढ़ते पर्यटन से स्थलों के संरक्षण पर दबाव पड़ सकता है, जिसके लिए प्रभावी प्रबंधन रणनीतियों की आवश्यकता है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1958 (Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains Act, 1958)

आगे की राह

  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा गोलाला गुड़ी मंदिर के लिए एक विस्तृत और वैज्ञानिक संरक्षण योजना तैयार की जाए।
  • पुनर्निर्माण कार्य में पारंपरिक निर्माण तकनीकों और सामग्रियों का उपयोग किया जाए ताकि मंदिर की मूल स्थापत्य शैली और ऐतिहासिक प्रामाणिकता बनी रहे।
  • रामप्पा, शिव मंदिर और गोलाला गुड़ी को एक एकीकृत विरासत परिसर के रूप में विकसित किया जाए, जिसमें पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएँ और जानकारी उपलब्ध हो।
  • स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल किया जाए और उन्हें इन स्थलों के महत्व के बारे में शिक्षित किया जाए।
  • इन स्थलों के बारे में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रचार-प्रसार अभियान चलाए जाएँ।
  • पर्यटन के सतत मॉडल को अपनाया जाए ताकि इन स्थलों पर पड़ने वाले पर्यावरणीय और सांस्कृतिक प्रभावों को कम किया जा सके।
  • आधुनिक तकनीकों जैसे लिडार (Lidar) और 3D स्कैनिंग का उपयोग करके इन स्थलों का दस्तावेजीकरण और निगरानी जारी रखी जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

राष्ट्रीय महत्व के स्थल · भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण · प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1958 · काकतीय वास्तुकला · रामप्पा मंदिर · विश्व धरोहर स्थल · सांस्कृतिक विरासत संरक्षण · तेलंगाना के मंदिर · पुरातत्व संरक्षण · स्थानीय कला और संस्कृति

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 49’, ‘note’: ‘राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों का संरक्षण’}

अवधारणा प्रवाह

गोलाला गुड़ी को राष्ट्रीय महत्व का स्थल घोषित किया गया।  →  ASI द्वारा प्राचीन स्मारक अधिनियम के तहत संरक्षण।  →  मंदिर की जीर्ण-शीर्ण अवस्था के कारण पुनर्निर्माण की आवश्यकता।  →  रामप्पा मंदिर के साथ एकीकृत परिसर का विकास।  →  क्षेत्र में सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।  →  काकतीय विरासत का संरक्षण और संवर्धन।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
2. प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1958, राष्ट्रीय महत्व के स्थलों के संरक्षण का प्रावधान करता है।
3. रामप्पा मंदिर को 2021 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। ASI संस्कृति मंत्रालय के तहत एक प्रमुख संगठन है। कथन 2 सही है। यह अधिनियम राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों और स्थलों के संरक्षण, रखरखाव और विनियमन के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है। कथन 3 सही है। रामप्पा मंदिर (जिसे काकतीय रुद्रेश्वर मंदिर भी कहा जाता है) को 2021 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था।

Q2. निम्नलिखित में से कौन सा अधिनियम भारत में राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण से संबंधित है?

  1. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
  2. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972
  3. प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1958
  4. सांस्कृतिक विरासत संरक्षण अधिनियम, 2000

उत्तर: प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1958 — प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1958 (Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains Act, 1958) भारत में राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण के लिए प्राथमिक कानून है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की भूमिका का परीक्षण कीजिए। हाल ही में गोलाला गुड़ी को राष्ट्रीय महत्व का स्थल घोषित किए जाने के संदर्भ में, ऐसे स्थलों के संरक्षण के समक्ष आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान हेतु उठाए जा सकने वाले कदमों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संक्षिप्त परिचय और उसके जनादेश से करें। भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में ASI की भूमिका का विस्तार से वर्णन करें, जिसमें अन्वेषण, उत्खनन, संरक्षण, रखरखाव और संग्रहालय प्रबंधन शामिल हों। गोलाला गुड़ी (Gollala Gudi) को राष्ट्रीय महत्व का स्थल घोषित करने के हालिया उदाहरण का उल्लेख करें और इसे रामप्पा मंदिर (Ramappa Temple) के साथ इसके संबंध पर प्रकाश डालें। राष्ट्रीय महत्व के स्थलों के संरक्षण में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करें, जैसे कि अतिक्रमण, प्रदूषण, प्राकृतिक आपदाएँ, अपर्याप्त धन, कुशल जनशक्ति की कमी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी का अभाव। इन चुनौतियों के समाधान के लिए उठाए जा सकने वाले कदमों का सुझाव दें, जिसमें जन जागरूकता बढ़ाना, आधुनिक तकनीकों (जैसे LiDAR) का उपयोग, सार्वजनिक-निजी भागीदारी, स्थानीय समुदायों को शामिल करना और कानूनी ढाँचे को मजबूत करना शामिल है। निष्कर्ष में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के महत्व पर बल दें।

स्रोत: The Hindu


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