यूपीएससी तैयारी: आरबीआई 9 सितंबर को करेगा 24,000 करोड़ रुपये के ट्रेजरी बिलों की नीलामी

Auction of 91-Day, 182-Day and 364-Day Treasury Bills — labelled illustration

यूपीएससी तैयारी: आरबीआई 9 सितंबर को करेगा 24,000 करोड़ रुपये के ट्रेजरी बिलों की नीलामी

✎ ट्रेजरी बिल भारत सरकार द्वारा जारी किए गए अल्पकालिक ऋण साधन हैं, जिनकी परिपक्वता अवधि एक वर्ष से कम होती है और इन्हें RBI द्वारा नीलामी के माध्यम से जारी किया जाता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।  |  GS Paper III — सरकारी बजट।
  • Prelims: ट्रेजरी बिल (T-Bills), अल्पकालिक सरकारी प्रतिभूतियाँ, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), सार्वजनिक ऋण प्रबंधन, गैर-प्रतिस्पर्धी बोली, खुदरा प्रत्यक्ष योजना, मुद्रा बाज़ार, राजकोषीय घाटा
  • Essay: भारत में आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में सरकारी उधारी की भूमिका।, मौद्रिक नीति के उपकरण और उनका अर्थव्यवस्था पर प्रभाव।

त्वरित पुनरावृत्ति: ट्रेजरी बिल भारत सरकार द्वारा जारी किए गए अल्पकालिक ऋण साधन हैं, जिनकी परिपक्वता अवधि एक वर्ष से कम होती है और इन्हें RBI द्वारा नीलामी के माध्यम से जारी किया जाता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हाल ही में भारत सरकार के लिए 91-दिवसीय, 182-दिवसीय और 364-दिवसीय ट्रेजरी बिलों (Treasury Bills) की नीलामी की घोषणा की है। इस नीलामी में कुल 24,000 करोड़ रुपये के ट्रेजरी बिल शामिल हैं, जो सरकार की अल्पकालिक उधारी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह नीलामी सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) के बाज़ार में RBI की सक्रिय भूमिका को दर्शाती है, जो देश की मौद्रिक और राजकोषीय नीतियों के समन्वय के लिए आवश्यक है।

पृष्ठभूमि

  • भारत सरकार अपनी वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बाज़ार से ऋण लेती है। इस ऋण को मुख्य रूप से ट्रेजरी बिलों और सरकारी बॉन्डों (Government Bonds) के माध्यम से जुटाया जाता है।
  • ट्रेजरी बिल अल्पकालिक ऋण साधन होते हैं, जिनकी परिपक्वता अवधि (maturity period) एक वर्ष से कम होती है, जबकि सरकारी बॉन्ड दीर्घकालिक ऋण साधन होते हैं।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक भारत सरकार के बैंकर और ऋण प्रबंधक के रूप में कार्य करता है। यह सरकार की ओर से ट्रेजरी बिलों और बॉन्डों की नीलामी का संचालन करता है।
  • इन नीलामियों में विभिन्न संस्थागत निवेशक जैसे बैंक, वित्तीय संस्थान, बीमा कंपनियाँ, और अब खुदरा निवेशक भी भाग ले सकते हैं।
  • सरकारी प्रतिभूतियाँ देश के वित्तीय बाज़ार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इनका उपयोग मौद्रिक नीति के संचालन में भी किया जाता है।
  • राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को वित्तपोषित करने और सरकार के दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए ट्रेजरी बिल एक महत्वपूर्ण उपकरण हैं।

ट्रेजरी बिल (Treasury Bills) क्या हैं?

  • ट्रेजरी बिल (T-Bills) भारत सरकार द्वारा जारी किए गए अल्पकालिक ऋण साधन हैं, जिनकी परिपक्वता अवधि एक वर्ष से कम होती है।
  • ये मुद्रा बाज़ार (Money Market) के महत्वपूर्ण घटक हैं और इन्हें शून्य-कूपन प्रतिभूतियों (Zero-Coupon Securities) के रूप में जारी किया जाता है, जिसका अर्थ है कि इन पर कोई ब्याज नहीं दिया जाता है।
  • इन्हें अंकित मूल्य (Face Value) से छूट पर जारी किया जाता है और परिपक्वता पर अंकित मूल्य पर भुनाया जाता है। उदाहरण के लिए, 100 रुपये का ट्रेजरी बिल 95 रुपये में जारी किया जा सकता है और परिपक्वता पर 100 रुपये का भुगतान किया जाता है।
  • भारत में ट्रेजरी बिल मुख्य रूप से 91-दिवसीय, 182-दिवसीय और 364-दिवसीय परिपक्वता अवधि में जारी किए जाते हैं।
  • इनकी नीलामी भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा साप्ताहिक आधार पर की जाती है, जिससे सरकार को अपनी अल्पकालिक नकदी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलती है।
  • निवेशक प्रतिस्पर्धी (Competitive) और गैर-प्रतिस्पर्धी (Non-Competitive) दोनों आधार पर इन नीलामियों में भाग ले सकते हैं। गैर-प्रतिस्पर्धी बोली छोटे निवेशकों और खुदरा निवेशकों को बाज़ार की अस्थिरता से बचाते हुए भागीदारी का अवसर देती है।
  • खुदरा निवेशक RBI की ‘खुदरा प्रत्यक्ष योजना’ (Retail Direct Scheme) के माध्यम से भी ट्रेजरी बिलों और सरकारी बॉन्डों में निवेश कर सकते हैं।
  • ट्रेजरी बिलों को अत्यधिक सुरक्षित निवेश माना जाता है क्योंकि ये भारत सरकार द्वारा समर्थित होते हैं, जिससे इनमें डिफ़ॉल्ट का जोखिम नगण्य होता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
ट्रेजरी बिल (Treasury Bills) की नीलामी सरकार के अल्पकालिक ऋण प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण साधन।
91-दिवसीय, 182-दिवसीय और 364-दिवसीय अवधि विभिन्न परिपक्वता अवधियों के माध्यम से सरकार की अल्पकालिक वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करना।
कुल अधिसूचित राशि ₹24,000 करोड़ सरकार की तात्कालिक नकदी आवश्यकताओं को दर्शाता है।
गैर-प्रतिस्पर्धी बोली सुविधा छोटे निवेशकों (व्यक्तियों, राज्य सरकारों, भविष्य निधि) को भागीदारी का अवसर प्रदान करना, जिससे वित्तीय समावेशन बढ़ता है।
RBI रिटेल डायरेक्ट पोर्टल के माध्यम से भागीदारी खुदरा निवेशकों के लिए सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश को सुलभ बनाना।
बहु-मूल्य विधि (Multiple Price Method) पर आधारित नीलामी बाजार-आधारित मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करना, जिससे सरकार को प्रतिस्पर्धी दरों पर धन प्राप्त हो सके।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • सरकारी व्यय के वित्तपोषण के लिए आवश्यक अल्पकालिक धन जुटाने में मदद करता है, जिससे राजकोषीय प्रबंधन सुदृढ़ होता है।
  • यह बाजार में तरलता (Liquidity) को प्रभावित करता है, क्योंकि नीलामी के माध्यम से धन सरकार के पास जाता है और फिर व्यय के माध्यम से वापस आता है।
  • ट्रेजरी बिलों की उपज (Yield) अल्पकालिक ब्याज दरों के लिए एक बेंचमार्क (Benchmark) के रूप में कार्य करती है, जो अर्थव्यवस्था में अन्य ऋण उत्पादों को प्रभावित करती है।

राजकोषीय प्रबंधन

  • सरकार को अपने राजस्व और व्यय के बीच अल्पकालिक बेमेल को प्रबंधित करने में सक्षम बनाता है, जिससे आकस्मिक वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
  • यह सरकार के ऋण पोर्टफोलियो को विविधता प्रदान करता है, जिससे दीर्घकालिक ऋण पर निर्भरता कम होती है और जोखिम का बेहतर प्रबंधन होता है।

मौद्रिक नीति

  • भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India – RBI) के लिए खुले बाजार परिचालन (Open Market Operations – OMO) का एक अप्रत्यक्ष उपकरण है, जिसके माध्यम से वह बाजार में तरलता को नियंत्रित कर सकता है।
  • ट्रेजरी बिलों की मांग और आपूर्ति बाजार की धारणा और ब्याज दर के रुझानों का संकेत देती है, जो RBI को मौद्रिक नीतिगत निर्णयों में सहायता करती है।

वित्तीय समावेशन

  • RBI रिटेल डायरेक्ट पोर्टल और गैर-प्रतिस्पर्धी बोली योजना के माध्यम से छोटे निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने का अवसर मिलता है, जिससे बचत को बढ़ावा मिलता है और वित्तीय समावेशन बढ़ता है।
  • यह व्यक्तियों को सुरक्षित निवेश विकल्प प्रदान करता है, जिससे वे अपनी बचत को सरकारी प्रतिभूतियों में लगा सकें।

चुनौतियाँ

1. राजकोषीय घाटा और ऋण

  • सरकार द्वारा लगातार ट्रेजरी बिलों की नीलामी उच्च राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) और बढ़ते सरकारी ऋण का संकेत हो सकती है।
  • यदि बाजार में पर्याप्त मांग नहीं है, तो सरकार को उच्च ब्याज दरों पर उधार लेना पड़ सकता है, जिससे भविष्य में ऋण चुकाने का बोझ बढ़ सकता है।

2. बाजार तरलता पर प्रभाव

  • बड़ी मात्रा में ट्रेजरी बिलों की नीलामी बाजार से तरलता को सोख सकती है, जिससे अन्य क्षेत्रों के लिए ऋण महंगा हो सकता है।
  • यह निजी निवेश और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को प्रभावित कर सकता है।

3. ब्याज दर जोखिम

  • बढ़ती ब्याज दरें सरकार के लिए उधार लेने की लागत को बढ़ा सकती हैं, जिससे ऋण चुकाने का बोझ बढ़ जाता है।
  • यह निवेशकों के लिए भी जोखिम पैदा करता है यदि वे ट्रेजरी बिलों को परिपक्वता से पहले बेचते हैं।

4. खुदरा भागीदारी की सीमाएं

  • खुदरा निवेशकों के लिए अधिकतम 5 प्रतिशत की सीमा उनकी भागीदारी को सीमित करती है, भले ही वे सरकारी प्रतिभूतियों में अधिक निवेश करना चाहें।
  • जागरूकता की कमी और तकनीकी जटिलताएं भी खुदरा भागीदारी को बाधित कर सकती हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
उच्च उधार आवश्यकताएं बढ़ता सरकारी ऋण और राजकोषीय घाटे का दबाव।
ब्याज दर में उतार-चढ़ाव सरकार की उधार लागत और निवेशकों के रिटर्न पर अनिश्चितता।
बाजार तरलता का प्रबंधन नीलामी के कारण बाजार से तरलता का अत्यधिक बहिर्वाह।
खुदरा निवेशकों की सीमित पहुंच छोटे निवेशकों के लिए पूर्ण भागीदारी में बाधाएं।
वैश्विक आर्थिक कारक अंतर्राष्ट्रीय ब्याज दरों और पूंजी प्रवाह का प्रभाव।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • RBI रिटेल डायरेक्ट योजना (RBI Retail Direct Scheme)

आगे की राह

  • सरकार को राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation) के प्रयासों को जारी रखना चाहिए ताकि उधार लेने की आवश्यकताएं कम हों।
  • RBI को बाजार में तरलता का सावधानीपूर्वक प्रबंधन करना चाहिए ताकि ट्रेजरी बिलों की नीलामी से उत्पन्न होने वाले किसी भी व्यवधान को कम किया जा सके।
  • खुदरा निवेशकों के बीच सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश के लाभों के बारे में जागरूकता बढ़ाई जानी चाहिए।
  • RBI रिटेल डायरेक्ट पोर्टल को और अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल (User-Friendly) बनाया जाना चाहिए ताकि खुदरा भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा सके।
  • सरकार को अपने ऋण प्रबंधन रणनीति में विविधता लानी चाहिए, जिसमें दीर्घकालिक और अल्पकालिक ऋण का संतुलित मिश्रण शामिल हो।
  • ब्याज दर जोखिमों को कम करने के लिए प्रभावी हेजिंग (Hedging) तंत्रों का पता लगाया जाना चाहिए।
  • अंतर्राष्ट्रीय पूंजी प्रवाह और वैश्विक ब्याज दर के रुझानों की निगरानी की जानी चाहिए ताकि घरेलू बाजार पर उनके प्रभाव को प्रबंधित किया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

ट्रेजरी बिल · सरकारी प्रतिभूतियाँ · मौद्रिक नीति · राजकोषीय प्रबंधन · भारतीय रिज़र्व बैंक · खुले बाज़ार परिचालन · मुद्रा बाज़ार · गैर-प्रतिस्पर्धी बोली · राजकोषीय घाटा · सार्वजनिक ऋण

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘अनुच्छेद 292’: ‘भारत सरकार द्वारा उधार लेना’}
  • {‘अनुच्छेद 293’: ‘राज्यों द्वारा उधार लेना’}

अवधारणा प्रवाह

सरकार को धन की आवश्यकता होती है।  →  RBI ट्रेजरी बिलों की नीलामी की घोषणा करता है।  →  निवेशक (बैंक, वित्तीय संस्थान, व्यक्ति) बोली लगाते हैं।  →  RBI सफल बोलीदाताओं का चयन करता है।  →  सरकार को धन प्राप्त होता है, निवेशक ट्रेजरी बिल प्राप्त करते हैं।  →  परिपक्वता पर, सरकार निवेशकों को मूलधन चुकाती है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ट्रेजरी बिल (Treasury Bills) भारत सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले अल्पकालिक ऋण साधन हैं।
2. इनकी परिपक्वता अवधि एक वर्ष से अधिक नहीं होती है।
3. ट्रेजरी बिल केवल प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से ही बेचे जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि ट्रेजरी बिल वास्तव में भारत सरकार द्वारा जारी अल्पकालिक ऋण साधन हैं। कथन 2 भी सही है क्योंकि इनकी परिपक्वता अवधि 91 दिन, 182 दिन या 364 दिन होती है, जो एक वर्ष से कम है। कथन 3 गलत है क्योंकि ट्रेजरी बिल प्रतिस्पर्धी और गैर-प्रतिस्पर्धी दोनों तरह की बोलियों के माध्यम से बेचे जाते हैं।

Q2. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा ट्रेजरी बिलों की नीलामी का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?

  1. वाणिज्यिक बैंकों को ऋण प्रदान करना
  2. सरकार के अल्पकालिक निधि आवश्यकताओं को पूरा करना
  3. मुद्रास्फीति को सीधे नियंत्रित करना
  4. विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाना

उत्तर: सरकार के अल्पकालिक निधि आवश्यकताओं को पूरा करना — ट्रेजरी बिल सरकार के अल्पकालिक ऋण साधन हैं। RBI द्वारा इनकी नीलामी का मुख्य उद्देश्य सरकार की अल्पकालिक वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए धन जुटाना है। यह राजकोषीय प्रबंधन का हिस्सा है।

Q3. अभिकथन (A): ट्रेजरी बिलों को ‘शून्य-कूपन प्रतिभूतियाँ’ (Zero-Coupon Securities) कहा जाता है।
कारण (R): ये बिना किसी ब्याज भुगतान के अंकित मूल्य से छूट पर जारी किए जाते हैं और परिपक्वता पर अंकित मूल्य पर भुनाए जाते हैं।

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — अभिकथन (A) सही है कि ट्रेजरी बिल शून्य-कूपन प्रतिभूतियाँ हैं। कारण (R) भी सही है कि वे बिना किसी ब्याज भुगतान के छूट पर जारी किए जाते हैं और परिपक्वता पर अंकित मूल्य पर भुनाए जाते हैं, जिससे निवेशक को लाभ होता है। कारण (R) अभिकथन (A) का सही स्पष्टीकरण भी है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ ट्रेजरी बिल क्या हैं और भारत सरकार के राजकोषीय प्रबंधन में इनकी क्या भूमिका है? भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा ट्रेजरी बिलों की नीलामी प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** ट्रेजरी बिल (T-Bills) की परिभाषा दें – भारत सरकार द्वारा जारी अल्पकालिक ऋण साधन, जिनकी परिपक्वता अवधि एक वर्ष से कम होती है। इन्हें ‘शून्य-कूपन प्रतिभूतियाँ’ भी कहा जाता है।
2. **राजकोषीय प्रबंधन में भूमिका:**
* **अल्पकालिक निधि आवश्यकताएँ:** सरकार की तात्कालिक नकदी आवश्यकताओं (जैसे वेतन भुगतान, दैनिक खर्च) को पूरा करना।
* **राजकोषीय घाटा वित्तपोषण:** राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) के एक हिस्से को अल्पकालिक रूप से वित्तपोषित करना।
* **बाज़ार स्थिरीकरण:** मुद्रा बाज़ार (Money Market) में तरलता (Liquidity) को बनाए रखने में सहायक।
* **बेंचमार्क दर:** अल्पकालिक ब्याज दरों के लिए एक बेंचमार्क प्रदान करना।
3. **RBI द्वारा नीलामी प्रक्रिया:**
* **अधिसूचना:** RBI द्वारा नीलामी की घोषणा, जिसमें राशि, परिपक्वता अवधि और नीलामी की तारीख शामिल होती है।
* **बोली के प्रकार:**
* **प्रतिस्पर्धी बोली (Competitive Bidding):** बड़े संस्थागत निवेशक (बैंक, वित्तीय संस्थान) जो ब्याज दर (यानी छूट दर) और मात्रा दोनों पर बोली लगाते हैं।
* **गैर-प्रतिस्पर्धी बोली (Non-Competitive Bidding):** छोटे निवेशक, राज्य सरकारें, भविष्य निधि आदि जो केवल मात्रा पर बोली लगाते हैं और उन्हें नीलामी में तय औसत दर पर आवंटन मिलता है। खुदरा निवेशक (Retail Investors) भी RBI रिटेल डायरेक्ट पोर्टल के माध्यम से इसमें भाग ले सकते हैं।
* **नीलामी विधि:** ‘बहु-मूल्य विधि’ (Multiple Price Method) का उपयोग किया जाता है, जहाँ प्रत्येक सफल बोली लगाने वाले को उसकी बोली वाली कीमत पर भुगतान करना होता है।
* **E-Kuber प्रणाली:** बोलियाँ RBI की कोर बैंकिंग समाधान (E-Kuber system) के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में प्रस्तुत की जाती हैं।
* **परिणाम और निपटान:** नीलामी के दिन परिणामों की घोषणा और अगले कार्य दिवस पर सफल बोलीदाताओं द्वारा भुगतान।
4. **निष्कर्ष:** ट्रेजरी बिल सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण और लचीला वित्तीय उपकरण हैं, जो अल्पकालिक नकदी प्रवाह को प्रबंधित करने और मुद्रा बाज़ार में तरलता बनाए रखने में मदद करते हैं।

स्रोत: RBI


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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