वित्तीय समावेशन योजनाओं की समीक्षा बैठक: DFS सचिव श्री संजय लोहिया की अध्यक्षता

वित्तीय समावेशन योजनाओं की समीक्षा बैठक: DFS सचिव श्री संजय लोहिया की अध्यक्षता

वित्तीय समावेशन योजनाओं की समीक्षा बैठक: DFS सचिव श्री संजय लोहिया की अध्यक्षता

वित्तीय समावेशन योजनाओं की प्रगतिसमीक्षा बैठकप्रगति आकलनकार्यान्वयन चुनौतियाँपहचानसुधारात्मक उपायरणनीति विकाससेवाओं तक पहुँचवृद्धिआर्थिक सशक्तिकरणसामाजिक न्यायसमग्र विकासआर्थिक वृद्धि
वित्तीय समावेशन योजनाओं की प्रगति

✎ वित्तीय समावेशन समाज के सभी वर्गों को सस्ती और सुलभ वित्तीय सेवाएँ प्रदान करने की एक प्रक्रिया है, जो समावेशी विकास और आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास और रोजगार
  • Prelims: वित्तीय समावेशन, प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY), सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ, मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया योजना, डिजिटल भुगतान
  • Essay: समावेशी विकास की दिशा में वित्तीय समावेशन की भूमिका, भारत में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन के वाहक के रूप में सरकारी योजनाएँ

त्वरित पुनरावृत्ति: वित्तीय समावेशन समाज के सभी वर्गों को सस्ती और सुलभ वित्तीय सेवाएँ प्रदान करने की एक प्रक्रिया है, जो समावेशी विकास और आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

वित्तीय सेवाएँ विभाग (DFS) के सचिव ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) योजनाओं की प्रगति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का उद्देश्य इन योजनाओं के कार्यान्वयन में हुई प्रगति का आकलन करना और वित्तीय सेवाओं तक पहुँच बढ़ाने के लिए भविष्य की रणनीतियों पर विचार-विमर्श करना था, ताकि समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा सके।

पृष्ठभूमि

  • वित्तीय समावेशन का अर्थ समाज के सभी वर्गों, विशेषकर कमजोर और निम्न आय वर्ग के लोगों को सस्ती और सुलभ वित्तीय सेवाएँ प्रदान करना है।
  • भारत सरकार ने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएँ शुरू की हैं, जिनमें प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) एक महत्वपूर्ण पहल है।
  • इन योजनाओं का उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं, ऋण, बीमा और पेंशन तक पहुँच सुनिश्चित करके लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है।
  • वित्तीय समावेशन से आर्थिक असमानता कम होती है और समावेशी विकास को बढ़ावा मिलता है।
  • डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना भी वित्तीय समावेशन का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जो लेनदेन को आसान और पारदर्शी बनाता है।
  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सरकार मिलकर वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy) को बढ़ावा देने के लिए भी काम कर रहे हैं।

वित्तीय समावेशन क्या है?

  • वित्तीय समावेशन का तात्पर्य व्यक्तियों और व्यवसायों के लिए उपयोगी और किफायती वित्तीय उत्पादों और सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करना है, जिनकी आवश्यकता उन्हें होती है।
  • इन सेवाओं में बैंकिंग खाते, बचत, ऋण, बीमा, भुगतान और प्रेषण (Remittance) शामिल हैं, जो जिम्मेदार और टिकाऊ तरीके से प्रदान की जाती हैं।
  • इसका मुख्य उद्देश्य समाज के उन वर्गों को वित्तीय मुख्यधारा में लाना है, जो अब तक औपचारिक वित्तीय सेवाओं से वंचित रहे हैं।
  • वित्तीय समावेशन आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) और गरीबी उन्मूलन के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है।
  • यह लोगों को अपनी आय का प्रबंधन करने, अप्रत्याशित झटकों से निपटने और अपने भविष्य के लिए निवेश करने में सक्षम बनाता है।
  • भारत में, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री जन धन योजना, अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना जैसी कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं।
  • वित्तीय समावेशन से डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलता है, क्योंकि यह डिजिटल लेनदेन के लिए एक आधार प्रदान करता है।
  • यह ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं की पहुँच बढ़ाकर क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में भी मदद करता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
वित्तीय समावेशन योजनाओं की प्रगति समीक्षा यह सुनिश्चित करता है कि सरकार की वित्तीय समावेशन पहलें प्रभावी ढंग से लागू हो रही हैं और लक्षित लाभार्थियों तक पहुँच रही हैं।
सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी वित्तीय समावेशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के बैंकों के सहयोगात्मक प्रयासों को दर्शाता है।
वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव द्वारा अध्यक्षता सरकार की ओर से वित्तीय समावेशन को उच्च प्राथमिकता देने और इसकी प्रगति की सीधी निगरानी को इंगित करता है।
योजनाओं के कार्यान्वयन में आने वाली बाधाओं पर चर्चा कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों की पहचान करने और उनके समाधान के लिए रणनीतियाँ विकसित करने में मदद करता है।
विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय वित्तीय समावेशन के व्यापक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) का एक महत्वपूर्ण चालक है, जो समाज के वंचित वर्गों को वित्तीय सेवाओं तक पहुँच प्रदान कर उनकी आय और बचत क्षमता को बढ़ाता है।
  • यह वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) को बढ़ावा देता है, क्योंकि अधिक लोग औपचारिक वित्तीय प्रणाली का हिस्सा बनते हैं, जिससे अनौपचारिक ऋणदाताओं पर निर्भरता कम होती है और वित्तीय बाजारों में गहराई आती है।

सामाजिक महत्व

  • वित्तीय समावेशन गरीबी उन्मूलन (Poverty Alleviation) और असमानता (Inequality) को कम करने में सहायक है, क्योंकि यह कमजोर वर्गों को ऋण, बीमा और बचत जैसी आवश्यक वित्तीय सेवाओं तक पहुँच प्रदान करता है।
  • यह सामाजिक सशक्तिकरण (Social Empowerment) को बढ़ावा देता है, विशेषकर महिलाओं और ग्रामीण आबादी के लिए, उन्हें अपने वित्तीय निर्णयों पर अधिक नियंत्रण रखने में सक्षम बनाता है।

शासनिक महत्व

  • वित्तीय समावेशन योजनाओं की नियमित समीक्षा सरकार की जवाबदेही (Accountability) और पारदर्शिता (Transparency) को बढ़ाती है, यह सुनिश्चित करती है कि सार्वजनिक धन का उपयोग प्रभावी ढंग से हो रहा है।
  • यह सरकारी कल्याणकारी योजनाओं (Welfare Schemes) के प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer – DBT) को सुगम बनाता है, जिससे लीकेज कम होता है और लाभार्थियों तक सहायता सीधे पहुँचती है।

चुनौतियाँ

1. डिजिटल साक्षरता और कनेक्टिविटी का अभाव

  • ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल उपकरणों के उपयोग और इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी वित्तीय सेवाओं तक पहुँच में बाधा डालती है।
  • कम डिजिटल साक्षरता वाले लोग ऑनलाइन बैंकिंग और मोबाइल भुगतान जैसी सुविधाओं का लाभ उठाने में असमर्थ रहते हैं, जिससे वित्तीय समावेशन की गति धीमी होती है।

2. वित्तीय उत्पादों की जटिलता और अनुपयुक्तता

  • मौजूदा वित्तीय उत्पाद अक्सर ग्रामीण आबादी और निम्न-आय वर्ग की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं होते हैं, जिससे उनकी स्वीकार्यता कम होती है।
  • जटिल नियम और शर्तें, साथ ही उच्च लेनदेन लागत, इन वर्गों के लिए वित्तीय सेवाओं को दुर्गम बना सकती हैं।

3. बुनियादी ढाँचे की कमी

  • बैंक शाखाओं, ATM और बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट (Banking Correspondent) नेटवर्क की अपर्याप्तता विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं तक भौतिक पहुँच को बाधित करती है।
  • बिजली और विश्वसनीय इंटरनेट जैसे बुनियादी ढाँचे की कमी डिजिटल वित्तीय सेवाओं के विस्तार में एक बड़ी चुनौती है।

4. जागरूकता और विश्वास का अभाव

  • वित्तीय उत्पादों और सेवाओं के बारे में जानकारी की कमी, साथ ही औपचारिक वित्तीय संस्थानों पर अविश्वास, लोगों को इन सेवाओं का उपयोग करने से रोकता है।
  • धोखाधड़ी और साइबर सुरक्षा संबंधी चिंताएँ भी लोगों को डिजिटल वित्तीय लेनदेन से दूर रखती हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
ग्रामीण क्षेत्रों में पहुँच बैंक शाखाओं और ATM की कमी, बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट नेटवर्क की अपर्याप्तता।
डिजिटल डिवाइड डिजिटल साक्षरता का अभाव और इंटरनेट कनेक्टिविटी की असमानता।
उत्पाद उपयुक्तता निम्न-आय वर्ग की आवश्यकताओं के अनुरूप वित्तीय उत्पादों की कमी।
वित्तीय साक्षरता वित्तीय उत्पादों और सेवाओं के बारे में जागरूकता का निम्न स्तर।
साइबर सुरक्षा डिजिटल लेनदेन में धोखाधड़ी और डेटा सुरक्षा संबंधी चिंताएँ।
आधारभूत संरचना बिजली और विश्वसनीय इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY)
  • अटल पेंशन योजना (APY)
  • प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY)
  • प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY)
  • मुद्रा योजना (Mudra Yojana)

आगे की राह

  • ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट नेटवर्क का विस्तार किया जाए तथा उन्हें पर्याप्त प्रशिक्षण और प्रोत्साहन प्रदान किया जाए।
  • डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाए, विशेषकर महिलाओं और कमजोर वर्गों के लिए, ताकि वे डिजिटल वित्तीय सेवाओं का सुरक्षित उपयोग कर सकें।
  • लक्षित आबादी की आवश्यकताओं के अनुरूप सरल, किफायती और लचीले वित्तीय उत्पादों का विकास किया जाए।
  • वित्तीय साक्षरता अभियानों को तेज किया जाए, जिसमें बचत, ऋण, बीमा और निवेश के महत्व पर जोर दिया जाए।
  • साइबर सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जाए और उपभोक्ताओं को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के लिए शिक्षित किया जाए।
  • दूरसंचार और डिजिटल अवसंरचना (Digital Infrastructure) में निवेश बढ़ाया जाए ताकि सभी क्षेत्रों में विश्वसनीय कनेक्टिविटी सुनिश्चित हो सके।
  • सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के बीच समन्वय और सहयोग को और मजबूत किया जाए ताकि वित्तीय समावेशन के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

वित्तीय समावेशन · प्रधानमंत्री जन धन योजना · प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण · डिजिटल भुगतान · सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ · वित्तीय साक्षरता · बैंक मित्र · आधार-सक्षम भुगतान प्रणाली · समावेशी विकास · कम लागत वाली वित्तीय सेवाएँ · वित्तीय स्थिरता · ग्रामीण अर्थव्यवस्था

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39’, ‘note’: ‘आजीविका के पर्याप्त साधनों का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘कमजोर वर्गों के आर्थिक हितों की अभिवृद्धि’}

अवधारणा प्रवाह

वित्तीय समावेशन योजनाओं की प्रगति समीक्षा  →  कार्यान्वयन में चुनौतियों की पहचान  →  सुधारात्मक उपायों और रणनीतियों का विकास  →  वित्तीय सेवाओं तक पहुँच में वृद्धि  →  आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय  →  समग्र आर्थिक संवृद्धि और विकास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) का उद्देश्य देश के प्रत्येक परिवार को कम से कम एक बैंक खाता प्रदान करना है।
2. PMJDY के तहत खोले गए खातों में ओवरड्राफ्ट सुविधा उपलब्ध नहीं है।
3. वित्तीय समावेशन का अर्थ केवल बैंक खाते उपलब्ध कराना है, न कि बीमा या पेंशन जैसी अन्य वित्तीय सेवाएँ।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है। PMJDY का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक परिवार को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ना है। कथन 2 गलत है। PMJDY खातों में कुछ शर्तों के साथ ओवरड्राफ्ट सुविधा उपलब्ध है। कथन 3 गलत है। वित्तीय समावेशन में बैंक खातों के साथ-साथ बीमा, पेंशन, ऋण और भुगतान सेवाओं जैसी अन्य वित्तीय सेवाएँ भी शामिल हैं।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने वाला/वाले प्रमुख कारक है/हैं?
1. बैंक शाखाओं का विस्तार
2. डिजिटल भुगतान अवसंरचना का विकास
3. वित्तीय साक्षरता कार्यक्रमों का क्रियान्वयन
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — बैंक शाखाओं का विस्तार, डिजिटल भुगतान अवसंरचना का विकास और वित्तीय साक्षरता कार्यक्रमों का क्रियान्वयन, ये सभी वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने वाले महत्वपूर्ण कारक हैं। ये सभी मिलकर लोगों को वित्तीय सेवाओं तक पहुँच बनाने और उनका प्रभावी ढंग से उपयोग करने में मदद करते हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में वित्तीय समावेशन के महत्व पर चर्चा कीजिए और इस दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों का मूल्यांकन कीजिए। क्या आप मानते हैं कि वित्तीय समावेशन ने समावेशी विकास को गति दी है? (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय में वित्तीय समावेशन को परिभाषित करें और इसके महत्व को संक्षेप में बताएं। मुख्य भाग में, वित्तीय समावेशन के महत्व को विस्तार से समझाएं (जैसे गरीबी उन्मूलन, आर्थिक स्थिरता, समावेशी विकास)। सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों का उल्लेख करें, जैसे प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY), अटल पेंशन योजना (APY), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY), मुद्रा योजना, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना (UPI, RuPay), बैंक मित्र मॉडल, आधार-सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS)। इन योजनाओं की सफलता और चुनौतियों का मूल्यांकन करें। अंत में, वित्तीय समावेशन और समावेशी विकास के बीच संबंध स्थापित करें, यह बताते हुए कि कैसे वित्तीय समावेशन ने समाज के वंचित वर्गों को सशक्त बनाया है और आर्थिक असमानता को कम करने में मदद की है। निष्कर्ष में, भविष्य की चुनौतियों और आगे की राह पर प्रकाश डालें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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