सोलापुर-मुंबई, अमरावती-पुणे उड़ानों को मिला संशोधित उड़ान योजना में चयन

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सोलापुर-मुंबई, अमरावती-पुणे उड़ानों को मिला संशोधित उड़ान योजना में चयन

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संशोधित UDAN योजना प्रक्रिया

✎ संशोधित UDAN में राज्य चुनौती-आधारित प्रक्रिया से मार्ग प्रस्तावित करते हैं, जबकि पुरानी योजना की व्यवहार्यता अंतर निधि (Viability Gap Funding) की रियायत-अवधि समाप्त होने के बाद कई मार्ग बंद होने की समस्या ही सतत क्षेत्रीय संपर्क…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था (समावेशी विकास, परिवहन अवसंरचना और क्षेत्रीय असंतुलन)  |  GS Paper II — शासन (सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप; केंद्र-राज्य सहयोग और सहकारी संघवाद)  |  GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा और अवसंरचना (नागर विमानन क्षेत्र का विकास)
  • Prelims: उड़े देश का आम नागरिक (UDAN) योजना, 2016 और इसका नोडल मंत्रालय (नागर विमानन मंत्रालय), क्षेत्रीय संपर्क योजना (Regional Connectivity Scheme), व्यवहार्यता अंतर निधि (Viability Gap Funding), क्षेत्रीय संपर्क निधि (Regional Connectivity Fund), भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (Airports Authority of India) की भूमिका, नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) की भूमिका, हेलीपोर्ट और वॉटर एयरोड्रोम का UDAN में समावेश, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की लेखापरीक्षा रिपोर्ट
  • Essay: हवाई यात्रा केवल महानगरों तक सीमित क्यों न रहे: क्षेत्रीय संपर्क और समावेशी विकास, सार्वजनिक सहायता से चलने वाले मार्गों की स्थिरता: सस्ती सेवा बनाम दीर्घकालिक व्यवहार्यता

त्वरित पुनरावृत्ति: संशोधित UDAN में राज्य चुनौती-आधारित प्रक्रिया से मार्ग प्रस्तावित करते हैं, जबकि पुरानी योजना की व्यवहार्यता अंतर निधि (Viability Gap Funding) की रियायत-अवधि समाप्त होने के बाद कई मार्ग बंद होने की समस्या ही सतत क्षेत्रीय संपर्क की असली चुनौती है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार ने संशोधित उड़े देश का आम नागरिक (UDAN) योजना के अंतर्गत सोलापुर-मुंबई और अमरावती-पुणे मार्गों का चयन किया है, जिसकी घोषणा नागर विमानन राज्य मंत्री ने की। इन मार्गों पर दोनों दिशाओं में उड़ानें चलेंगी, जिनका उद्देश्य महाराष्ट्र के इन नगरों और राज्य के प्रमुख आर्थिक, औद्योगिक तथा शैक्षणिक केंद्रों के बीच सीधा हवाई संपर्क सुधारना है। संशोधित योजना में मार्गों का चयन चुनौती-आधारित प्रक्रिया से होता है, जिसमें प्रत्येक राज्य यात्री मांग, क्षेत्रीय संपर्क के महत्व और हवाई यात्रा की वृद्धि-संभावना के आधार पर चार मार्ग और दो हवाई अड्डे प्रस्तावित कर सकता है। समाचार का नीतिगत महत्व यह भी है कि इसमें योजना के पुराने अनुभव, विशेषकर मार्गों के सहायता-अवधि के बाद बंद होने की समस्या, पर भी ध्यान खींचा गया है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में हवाई यात्रा का बड़ा हिस्सा कुछ महानगरीय हवाई अड्डों तक केंद्रित रहा है, जबकि छोटे नगरों और दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी हवाई सेवा की कमी बनी रही। इसी असंतुलन को दूर करने के लिए क्षेत्रीय संपर्क की नीति अपनाई गई।
  • उड़े देश का आम नागरिक (UDAN) योजना को राष्ट्रीय नागर विमानन नीति, 2016 के अंतर्गत आरंभ किया गया। इसका मूल उद्देश्य कम दूरी की उड़ानों को आम नागरिकों के लिए किफायती बनाना था।
  • पुरानी योजना में एयरलाइनों को शुरुआती वर्षों के लिए व्यवहार्यता अंतर निधि (Viability Gap Funding) के माध्यम से सहायता दी जाती थी, ताकि कम यात्री-मांग वाले मार्ग शुरू हो सकें। यह सहायता एक निश्चित रियायत-अवधि तक दी जाती थी।
  • रियायत-अवधि पूरी होने के बाद कई मार्ग आर्थिक रूप से टिक नहीं पाए।
  • संशोधित योजना में चयन की प्रक्रिया चुनौती-आधारित रखी गई है, जिसमें राज्यों की प्रस्तावना और यात्री मांग जैसे मानदंड महत्वपूर्ण हैं। इससे संघीय ढाँचे में राज्यों की भागीदारी और स्थानीय आवश्यकताओं की भूमिका बढ़ती है।

उड़े देश का आम नागरिक (UDAN) योजना क्या है?

  • यह क्षेत्रीय संपर्क योजना (Regional Connectivity Scheme) है, जिसका उद्देश्य कम सेवा वाले और अनुपयोगी हवाई अड्डों को जोड़कर हवाई यात्रा को सस्ती और व्यापक बनाना है।
  • इसका नोडल मंत्रालय नागर विमानन मंत्रालय है। हवाई अड्डों के संचालन में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (Airports Authority of India) और विमान सेवा के नियमन में नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) की भूमिका प्रमुख है।
  • इसमें एयरलाइनों को मार्ग चलाने के लिए व्यवहार्यता अंतर निधि (Viability Gap Funding) के माध्यम से सीमित अवधि की सहायता दी जाती है, ताकि मार्ग आर्थिक रूप से स्थापित हो सकें।
  • इस योजना के लिए क्षेत्रीय संपर्क निधि (Regional Connectivity Fund) का प्रावधान है, जिससे ऐसी सहायता का वित्तपोषण होता है।
  • योजना में केवल हवाई अड्डे ही नहीं, बल्कि हेलीपोर्ट और वॉटर एयरोड्रोम को भी शामिल किया गया है, जिससे पहाड़ी, द्वीपीय और जलीय क्षेत्रों का संपर्क भी संभव होता है।
  • संशोधित योजना में मार्ग चयन यात्री मांग, क्षेत्रीय संपर्क की आवश्यकता और वृद्धि-संभावना पर आधारित है तथा राज्य प्रस्ताव प्रस्तुत करते हैं।
  • पुरानी योजना की एक प्रमुख चुनौती यह रही कि सहायता समाप्त होने के बाद मार्ग टिक नहीं पाए, इसलिए अब निष्पादन-मानदंड और आवधिक समीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
चयन की प्रक्रिया चुनौती-आधारित (challenge-based) प्रक्रिया से मार्गों का चयन, जिसमें राज्य प्रस्ताव देते हैं और मूल्यांकन यात्री माँग, क्षेत्रीय संपर्क की आवश्यकता और वृद्धि की संभावना पर होता है
चयनित मार्ग सोलापुर-मुंबई-सोलापुर और अमरावती-पुणे-अमरावती, दोनों दिशाओं की उड़ानों सहित
राज्य-स्तरीय कोटा प्रत्येक राज्य चार हवाई मार्ग और दो हवाई अड्डों का प्रस्ताव दे सकता है
योजना का उद्देश्य महानगरों से बाहर के शहरों तक हवाई संपर्क का विस्तार और शिक्षा, रोजगार, व्यापार तथा विकास के अवसरों तक पहुँच
नोडल मंत्रालय नागर विमानन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation), जिसकी घोषणा नागर विमानन राज्य मंत्री द्वारा की गई

महत्व

आर्थिक

  • मुंबई और पुणे जैसे आर्थिक केंद्रों से सीधा संपर्क सोलापुर और अमरावती के व्यापार, निवेश और औद्योगिक गतिविधि को गति देता है
  • हवाई संपर्क से परिवहन समय घटता है, जिससे क्षेत्रीय उद्योगों और सेवा क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा बढ़ती है

सामाजिक एवं शैक्षिक

  • पुणे और मुंबई के शैक्षिक केंद्रों तक सीधी पहुँच से छात्रों, शोधार्थियों और परीक्षार्थियों की गतिशीलता बढ़ती है
  • स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा परामर्श के लिए बड़े शहरों तक पहुँच आसान होती है

क्षेत्रीय संतुलन

  • विदर्भ और दक्षिण-मध्य महाराष्ट्र जैसे पिछड़े या कम संपर्क वाले क्षेत्रों को राष्ट्रीय विमानन नेटवर्क से जोड़ना क्षेत्रीय असमानता घटाने की दिशा में कदम है
  • महानगरीय केंद्रों पर हवाई यातायात का दबाव कम करने में भी सहायक हो सकता है

चुनौतियाँ

1. मार्गों की आर्थिक स्थिरता

  • मूल उड़े देश का आम नागरिक (UDAN) योजना में व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (Viability Gap Funding) सीमित अवधि के लिए दिया जाता था, जिसके बाद कई मार्ग बंद हो गए
  • नियंत्रक-महालेखा परीक्षक (CAG) की लेखा परीक्षा रिपोर्ट के अनुसार रियायत अवधि पूरी होने के बाद 58 मार्ग बंद हुए, जिनमें 16 मार्गों का भार कारक (Load Factor) 70 प्रतिशत से अधिक था

2. छोटे हवाई अड्डों की व्यवहार्यता

  • अकोला, धुलिया, चंद्रपुर, कराड और बारामती जैसी हवाई पट्टियों की तकनीकी और वाणिज्यिक व्यवहार्यता का चरणबद्ध आकलन अभी आवश्यक है
  • नियमित यात्री और माल परिवहन के लिए बुनियादी ढाँचे, सुरक्षा मानकों और परिचालन लागत का समग्र मूल्यांकन करना होगा

3. माँग-आधारित योजना बनाम क्षेत्रीय न्याय

  • यात्री माँग पर आधारित चयन से वे क्षेत्र पीछे रह सकते हैं जहाँ माँग अभी उभर रही है परंतु संपर्क की आवश्यकता अधिक है
  • वाणिज्यिक लाभ और सामाजिक आवश्यकता के बीच संतुलन बनाना नीति-निर्माण की मुख्य चुनौती है

4. राज्य और केंद्र के बीच समन्वय

  • हवाई परिवहन संघ सूची का विषय है, जबकि हवाई अड्डों के भूमि अधिग्रहण, स्थानीय अवसंरचना और राज्य प्रस्तावों में राज्य सरकारों की भूमिका निर्णायक है
  • चयन, निगरानी और समीक्षा के लिए स्पष्ट संस्थागत तंत्र और प्रदर्शन-आधारित मानक आवश्यक हैं

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
रियायत अवधि के बाद मार्गों का बंद होना CAG रिपोर्ट के अनुसार 58 मार्ग बंद हुए, जिनमें कुछ मार्गों में उच्च भार कारक था, जो माँग और वाणिज्यिक व्यवहार्यता के बीच अंतर दर्शाता है
छोटे हवाई अड्डों की परिचालन क्षमता कई हवाई पट्टियों में नियमित उड़ान संचालन के लिए तकनीकी और वित्तीय आकलन लंबित है
माँग का सटीक आकलन यात्री माँग के आँकड़ों की विश्वसनीयता और भविष्य की वृद्धि का अनुमान सही न होने पर मार्ग टिक नहीं पाते
क्षेत्रीय असमानता प्रस्ताव देने की क्षमता वाले राज्यों और कम संसाधन वाले क्षेत्रों के बीच अवसरों का अंतर बना रह सकता है
दीर्घकालिक वित्तपोषण सीमित अवधि के सहायता मॉडल से आगे स्थायी वित्तपोषण व्यवस्था का अभाव है

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • उड़े देश का आम नागरिक (UDAN) (Ude Desh ka Aam Nagrik)

आगे की राह

  • छोटे हवाई अड्डों (अकोला, धुलिया, चंद्रपुर, कराड, बारामती) के लिए चरणबद्ध तकनीकी और वाणिज्यिक व्यवहार्यता अध्ययन किए जाएँ
  • विदर्भ क्षेत्र के लिए अकोला से मुंबई और पुणे की माँग का विस्तृत आकलन किया जाए
  • रियायत अवधि के बाद भी सिद्ध माँग वाले मार्गों को बनाए रखने के लिए प्रदर्शन-आधारित और आवधिक समीक्षा वाला सहायता तंत्र विकसित किया जाए
  • मार्ग-स्तर पर यात्री माँग, भार कारक और परिचालन लागत के आँकड़े नियमित रूप से सार्वजनिक और विश्लेषणीय बनाए जाएँ
  • राज्य सरकारों, हवाई अड्डा प्राधिकरणों और विमानन कंपनियों के बीच समन्वय के लिए स्पष्ट संस्थागत ढाँचा तय किया जाए
  • क्षेत्रीय संपर्क को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की नीतियों के साथ जोड़ा जाए, ताकि केवल परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि समग्र विकास सुनिश्चित हो

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

क्षेत्रीय वायु संपर्क (Regional Air Connectivity) · उड़े देश का आम नागरिक (UDAN – Ude Desh ka Aam Nagrik) · संशोधित उड़ान योजना (Modified UDAN Scheme) · व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (Viability Gap Funding) · क्षेत्रीय संपर्क निधि (Regional Connectivity Fund) · राष्ट्रीय नागर विमानन नीति, 2016 (National Civil Aviation Policy, 2016) · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) · भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) की लेखापरीक्षा · भार कारक (Passenger Load Factor) · बाज़ार विफलता और सार्वजनिक हस्तक्षेप (Market Failure and Public Intervention) · विदर्भ का आर्थिक एवं औद्योगिक विकास · सतत क्षेत्रीय संपर्क (Sustainable Regional Connectivity)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • सातवीं अनुसूची, संघ सूची की प्रविष्टि 29 (वायु मार्ग, विमान और वायु नौवहन) — हवाई परिवहन पर संघ का अधिकार

अवधारणा प्रवाह

राज्य सरकारें चुनौती-आधारित प्रक्रिया में मार्ग और हवाई अड्डों के प्रस्ताव भेजती हैं  →  यात्री माँग, क्षेत्रीय संपर्क की आवश्यकता और वृद्धि की संभावना के आधार पर मार्गों का चयन होता है  →  चयनित मार्गों पर दोनों दिशाओं में उड़ानें शुरू होकर राज्य के आर्थिक, औद्योगिक और शैक्षिक केंद्रों से जुड़ती हैं  →  रियायत अवधि के बाद मार्गों की स्थिरता माँग और वाणिज्यिक व्यवहार्यता पर निर्भर करती है  →  CAG जैसे लेखा परीक्षा तंत्र के निष्कर्षों से प्रदर्शन-आधारित समीक्षा और सुधार की आवश्यकता बनती है  →  परिणामस्वरूप क्षेत्रीय हवाई संपर्क का दीर्घकालिक और टिकाऊ विस्तार सुनिश्चित करने के लिए नीति में संशोधन होता है

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उड़े देश का आम नागरिक (UDAN) योजना वर्ष 2016 में राष्ट्रीय नागर विमानन नीति के अंतर्गत आरंभ की गई थी।
2. इस योजना में क्षेत्रीय मार्गों पर परिचालन करने वाली विमानन कंपनियों को व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (Viability Gap Funding) की सहायता दी जाती है।
3. इस योजना के अंतर्गत सभी क्षेत्रीय मार्गों पर हवाई किराया सीमा-मुक्त रहता है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: UDAN की शुरुआत वर्ष 2016 में राष्ट्रीय नागर विमानन नीति के अंतर्गत हुई। कथन 2 सही है: व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण के माध्यम से विमानन कंपनियों को मार्ग-परिचालन में आर्थिक सहायता मिलती है। कथन 3 गलत है: योजना में क्षेत्रीय उड़ानों के लिए किराया-सीमा का प्रावधान है, इसलिए किराया सीमा-मुक्त नहीं है। अतः उत्तर ‘केवल दो’ है।

Q2. अभिकथन (A): विमानन से जुड़ी क्षेत्रीय वायु संपर्क योजनाओं का नीति-निर्धारण मुख्यतः केंद्र सरकार के स्तर पर होता है।
कारण (R): संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची की प्रविष्टि 29 में वायुमार्ग, विमान, वायु नौवहन और विमानपत्तनों (aerodromes) का प्रावधान है।

उपर्युक्त अभिकथन और कारण के संदर्भ में सही उत्तर चुनिए।

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, किंतु (R) सही है।

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — संघ सूची की प्रविष्टि 29 में वायुमार्ग, विमान, वायु नौवहन तथा विमानपत्तनों का उल्लेख है, इसलिए विमानन विषय पर विधि-निर्माण और नीति का मुख्य अधिकार केंद्र के पास है। इसी कारण क्षेत्रीय वायु संपर्क योजनाएँ केंद्र द्वारा संचालित होती हैं, और कारण अभिकथन की सही व्याख्या करता है।

Q3. निम्नलिखित सुमेलों पर विचार कीजिए:
सूची-I (संस्था/निकाय)
1. भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (Airports Authority of India)
2. नागर विमानन महानिदेशालय (Directorate General of Civil Aviation)
3. भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (Comptroller and Auditor General of India)

सूची-II (कार्य)
a. विमानन सुरक्षा और विनियमन संबंधी नियामक कार्य
b. हवाई अड्डों का प्रचालन और प्रबंधन
c. सरकारी व्यय तथा योजनाओं की लेखापरीक्षा

सही सुमेलन चुनिए।

  1. 1-b, 2-a, 3-c
  2. 1-a, 2-b, 3-c
  3. 1-c, 2-a, 3-b
  4. 1-b, 2-c, 3-a

उत्तर: 1-b, 2-a, 3-c — भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण हवाई अड्डों के प्रचालन और प्रबंधन से जुड़ा है (1-b)। नागर विमानन महानिदेशालय विमानन सुरक्षा और विनियमन का नियामक है (2-a)। भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक सरकारी योजनाओं और व्यय की लेखापरीक्षा करते हैं (3-c)।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ क्षेत्रीय वायु संपर्क योजनाएँ केवल बाज़ार की माँग पर नहीं, बल्कि सार्वजनिक वित्तीय सहायता पर भी टिकी होती हैं। उड़े देश का आम नागरिक (UDAN) योजना के संशोधित स्वरूप के संदर्भ में इस दृष्टिकोण का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि सहायता-अवधि समाप्त होने के बाद भी मार्गों को सतत बनाए रखने के लिए किन नीतिगत उपायों की आवश्यकता है। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर संरचना (मॉडल उत्तर-बिंदु):
1. भूमिका: मार्च 2026 की घोषणा के संदर्भ में सोलापुर–मुंबई और अमरावती–पुणे मार्गों का चयन, जिन्हें संशोधित UDAN के अंतर्गत चुना गया; चयन प्रक्रिया चुनौती-आधारित है, जिसमें प्रत्येक राज्य चार वायु मार्ग और दो हवाई अड्डे प्रस्तावित कर सकता है (यात्री-माँग, क्षेत्रीय संपर्क का महत्त्व और विकास-संभावना के आधार पर)।
2. योजना की पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय नागर विमानन नीति, 2016 के अंतर्गत UDAN की शुरुआत; व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (Viability Gap Funding) द्वारा विमानन कंपनियों को सहायता; क्षेत्रीय संपर्क निधि (Regional Connectivity Fund) द्वारा वित्तीय स्रोत; सहायता-अवधि के बाद मार्ग-परिचालन की चुनौती।
3. संवैधानिक आधार: संघ सूची की प्रविष्टि 29 (वायुमार्ग, विमान, विमानपत्तन) के कारण विषय पर केंद्र का प्रमुख अधिकार; राज्यों द्वारा प्रस्ताव देना और हवाई अड्डों के विकास में सहयोग, अर्थात सहकारी संघवाद का व्यावहारिक रूप।
4. आलोचनात्मक विश्लेषण के बिंदु: (क) सार्वजनिक सहायता पर निर्भरता और बाज़ार-आधारित स्थिरता का प्रश्न; (ख) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की लेखापरीक्षा के अनुसार 58 मार्ग सहायता-अवधि पूरी होने के बाद बंद हुए, जिनमें 16 मार्गों पर भार कारक 70 प्रतिशत से अधिक रहा था, जो बताता है कि माँग होने पर भी व्यावसायिक व्यवहार्यता सुनिश्चित नहीं होती; (ग) मार्ग-बंदी से यात्रियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव; (घ) संसाधन-आवंटन में दक्षता बनाम क्षेत्रीय समता का द्वंद्व।
5. विभिन्न दृष्टिकोण: समर्थक मत कि बाज़ार-विफलता की स्थिति में सरकारी हस्तक्षेप आवश्यक है और वायु संपर्क आर्थिक अवसर, शिक्षा और रोज़गार तक पहुँच बढ़ाता है; आलोचक मत कि सहायता पर निर्भर मार्ग दीर्घकालिक नहीं होते और राजकोषीय भार बढ़ता है।
6. सतत संपर्क के उपाय: मार्ग-प्रदर्शन के आधार पर समय-समय पर समीक्षा और निष्पादन-मानदंड; आकांक्षी क्षेत्रों के कम-उपयोग वाले हवाई क्षेत्रों (जैसे अकोला, धुले, चंद्रपुर, कराड़ और बारामती, जिनका उल्लेख विशेषज्ञ विश्लेषण में आया) का चरणबद्ध तकनीकी और वाणिज्यिक मूल्यांकन; राज्य स्तर पर क्षेत्रीय संपर्क सहायता योजना का विचार, जो प्रदर्शित माँग वाले मार्गों को सहारा दे; विदर्भ जैसे क्षेत्र में माँग-आकलन।
7. निष्कर्ष: सहायता को स्थायी निर्भरता न बनाकर, प्रदर्शन-आधारित, समीक्षित और राज्य-केंद्र सहयोग वाले ढाँचे से ही क्षेत्रीय वायु संपर्क को टिकाऊ बनाया जा सकता है।

स्रोत: The Indian Express

Maharashtra PCS (MPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: सोलापूर-मुंबई आणि अमरावती-पुणे या मार्गांवरील विमानसेवांची निवड ‘संशोधित उडान योजने’ अंतर्गत करण्यात आली आहे. या योजनेचा मुख्य उद्देश काय आहे?

  1. A. देशांतर्गत आणि आंतरराष्ट्रीय विमानसेवांचे खाजगीकरण करणे
  2. B. दुर्गम आणि कमी सेवा असलेल्या मार्गांवर विमानसेवा उपलब्ध करून देणे
  3. C. विमानसेवांच्या किमती वाढवून सरकारचे उत्पन्न वाढवणे
  4. D. फक्त महाराष्ट्रातील प्रमुख शहरांमधील विमानसेवांवर लक्ष केंद्रित करणे

उत्तर: B. दुर्गम आणि कमी सेवा असलेल्या मार्गांवर विमानसेवा उपलब्ध करून देणे — संशोधित उडान योजना ही केंद्र सरकारची एक उपक्रम आहे ज्याचा मुख्य उद्देश दुर्गम आणि कमी सेवा असलेल्या मार्गांवर विमानसेवा उपलब्ध करून देणे हा आहे.

Mains: महाराष्ट्रातील सोलापूर-मुंबई आणि अमरावती-पुणे या मार्गांवरील विमानसेवांच्या निवडीमागील ‘संशोधित उडान योजने’चे महत्व आणि महाराष्ट्राच्या विकासासाठी त्याचे संभाव्य परिणाम यावर 250 शब्दांत चर्चा करा.


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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