11 Sep यूपीएससी/पीसीएस के लिए लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर की प्रगति समीक्षा
✎ राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) गुजरात के लोथल में भारत की पांच सहस्राब्दियों से अधिक पुरानी समुद्री विरासत को संरक्षित, प्रदर्शित और बढ़ावा देने के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जो सांस्कृतिक कूटनीति और पर्यटन को भी…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भारतीय संस्कृति और विरासत | GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध (सांस्कृतिक कूटनीति) | GS Paper III — पर्यटन और अवसंरचना विकास
- Prelims: राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC), लोथल, धोलेरा एक्सप्रेसवे, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), समुद्री अनुसंधान संस्थान (MRI), प्रकाशस्तंभ संग्रहालय
- Essay: भारत की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और वैश्विक पहचान, समुद्री शक्ति और कूटनीति में सांस्कृतिक विरासत की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) गुजरात के लोथल में भारत की पांच सहस्राब्दियों से अधिक पुरानी समुद्री विरासत को संरक्षित, प्रदर्शित और बढ़ावा देने के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जो सांस्कृतिक कूटनीति और पर्यटन को भी बढ़ावा दे रही है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सरबानंदा सोनोवाल ने राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) सोसायटी की दूसरी शासी परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में गुजरात के लोथल में बन रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति की समीक्षा की गई, जिसका उद्देश्य भारत की पांच सहस्राब्दियों से अधिक पुरानी समुद्री विरासत को पुनर्जीवित करना और प्रदर्शित करना है। बैठक में परियोजना के चरण 1ए में 82 प्रतिशत कार्य पूरा होने और 13 देशों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर होने की जानकारी दी गई, जो इस परियोजना के वैश्विक सहयोग प्रयासों को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- भारत की एक समृद्ध और प्राचीन समुद्री विरासत है, जिसमें सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान लोथल जैसे बंदरगाहों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
- राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) की परिकल्पना भारत की इस गौरवशाली समुद्री विरासत को संरक्षित करने, प्रदर्शित करने और बढ़ावा देने के लिए की गई है।
- यह परियोजना गुजरात के लोथल में विकसित की जा रही है, जो एक ऐतिहासिक सिंधु घाटी सभ्यता स्थल और प्राचीन बंदरगाह शहर है।
- परियोजना का उद्देश्य लोथल को समुद्री विरासत, ज्ञान, शिक्षा और पर्यटन के विश्व स्तर पर प्रसिद्ध केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
- NMHC को भारत सरकार द्वारा शुरू की गई सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और समुद्री पहलों में से एक माना जाता है।
- परियोजना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक समर्थन मिल रहा है, जिसमें विभिन्न देश कलाकृतियों, प्रतिकृतियों और अनुसंधान सहयोग के लिए साझेदारी कर रहे हैं।
राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) क्या है?
- राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) गुजरात के लोथल में विकसित की जा रही एक बहुआयामी परियोजना है, जिसका उद्देश्य भारत की पांच सहस्राब्दियों से अधिक पुरानी समुद्री विरासत को पुनर्जीवित करना और प्रदर्शित करना है।
- यह परिसर भारत की समुद्री विरासत के लिए एक विश्व स्तरीय संग्रहालय और अनुसंधान केंद्र के रूप में कार्य करेगा, जिसमें प्राचीन से आधुनिक काल तक की समुद्री गतिविधियों को दर्शाया जाएगा।
- परियोजना में विभिन्न गैलरी, एक 5डी डोम थिएटर, तटीय राज्य मंडप, एक प्रकाशस्तंभ संग्रहालय और एक समुद्री अनुसंधान संस्थान (MRI) शामिल हैं।
- NMHC का लक्ष्य समुद्री विरासत, ज्ञान, शिक्षा और पर्यटन का एक वैश्विक केंद्र बनना है, जो आगंतुकों को भारत के समुद्री इतिहास की गहरी समझ प्रदान करेगा।
- यह परियोजना समुद्री कूटनीति का एक शक्तिशाली साधन भी बन रही है, जिसमें 13 से अधिक देशों ने कलाकृतियों के आदान-प्रदान, अनुसंधान सहयोग और सांस्कृतिक जुड़ाव के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं।
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) लोथल में चल रही खुदाई का कार्य कर रहा है, जो NMHC के लिए महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संदर्भ और कलाकृतियाँ प्रदान करेगा।
- परियोजना के तहत एक म्यूज़ियोटेल और एक इको रिसॉर्ट भी प्रस्तावित है, जो आगंतुकों के लिए ठहरने और मनोरंजन की सुविधाएँ प्रदान करेगा।
- गुजरात सरकार कनेक्टिविटी, बिजली, पानी और पर्यटक सुविधाओं के लिए निरंतर समर्थन प्रदान कर रही है, जिससे परियोजना के समग्र विकास में सहायता मिल रही है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| लोथल में अवस्थिति | हड़प्पा सभ्यता के एक प्राचीन बंदरगाह शहर लोथल में स्थित, यह भारत की 5,000 वर्षों से अधिक पुरानी समुद्री विरासत को प्रदर्शित करता है। |
| बहुआयामी परियोजना | इसमें समुद्री विरासत, ज्ञान, शिक्षा और पर्यटन के केंद्र के रूप में लोथल को स्थापित करने का लक्ष्य है, जिसमें संग्रहालय, अनुसंधान संस्थान और पर्यटन सुविधाएं शामिल हैं। |
| अंतर्राष्ट्रीय सहयोग | पुर्तगाल, यूएई, वियतनाम, नीदरलैंड सहित 13 देशों ने समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे कलाकृतियों, प्रतिकृतियों और अनुसंधान का आदान-प्रदान संभव होगा। |
| चरणबद्ध निर्माण | परियोजना को कई चरणों में क्रियान्वित किया जा रहा है, जिसमें चरण 1ए का 82% कार्य पूरा हो चुका है, और चरण 1बी तथा चरण 2 की योजनाएं भी प्रगति पर हैं। |
| बुनियादी ढांचा विकास | धोलेरा एक्सप्रेसवे, उच्च गति रेल गलियारा और लोथल में चल रही खुदाई जैसी बाहरी अवसंरचना भी परियोजना के साथ-साथ विकसित की जा रही है। |
| शासन और संस्थागत ढांचा | सोसायटी ने आयकर छूट और CSR पंजीकरण जैसे प्रमुख वैधानिक पंजीकरण पूरे कर लिए हैं, और प्रस्तावित उपनियमों को भी मंजूरी दी गई है। |
महत्व
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व
- यह परियोजना भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को पुनर्जीवित करती है और प्रदर्शित करती है, जो सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर आधुनिक युग तक फैली हुई है।
- लोथल जैसे प्राचीन स्थलों को वैश्विक मानचित्र पर लाती है, जिससे भारत के ऐतिहासिक समुद्री व्यापारिक संबंधों और नवाचारों को उजागर किया जाता है।
पर्यटन और आर्थिक संवृद्धि
- एनएमएचसी लोथल को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
- यह समुद्री पर्यटन को बढ़ावा देगा, जिससे भारत के तटीय क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी।
अंतर्राष्ट्रीय संबंध और कूटनीति
- विभिन्न देशों के साथ सहयोग समुद्री कूटनीति का एक शक्तिशाली साधन बन गया है, जिससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा मिलता है।
- यह भारत को वैश्विक समुद्री समुदाय में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करता है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी मजबूत होती है।
शिक्षा और अनुसंधान
- समुद्री अनुसंधान संस्थान (MRI) और अन्य शैक्षिक सुविधाएं समुद्री विज्ञान, इतिहास और प्रौद्योगिकी में अनुसंधान को बढ़ावा देंगी।
- यह छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक मूल्यवान संसाधन होगा, जिससे समुद्री क्षेत्र में ज्ञान का सृजन और प्रसार होगा।
चुनौतियाँ
1. परियोजना का समय पर पूरा होना
- परियोजना के विभिन्न चरणों को निर्धारित समय-सीमा (जैसे चरण 1ए के लिए 31 अक्टूबर 2026) के भीतर पूरा करना एक चुनौती है।
- निर्माण कार्यों की जटिलता और विभिन्न घटकों के समन्वय में देरी की संभावना रहती है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढांचा परियोजना प्रबंधन
2. संसाधन जुटाना और वित्तपोषण
- परियोजना के विशाल पैमाने को देखते हुए, निरंतर और पर्याप्त वित्तीय संसाधनों को जुटाना महत्वपूर्ण है, विशेषकर CSR और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से।
- दीर्घकालिक स्थिरता के लिए वित्तपोषण मॉडल को मजबूत करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: सार्वजनिक-निजी भागीदारी, वित्तपोषण
3. कलाकृतियों का संरक्षण और प्रदर्शन
- 1,492 कलाकृतियों की स्थापना और उनके उचित संरक्षण के लिए विशेषज्ञता और सावधानी की आवश्यकता है।
- प्रदर्शनी को आगंतुकों के लिए आकर्षक और सूचनात्मक बनाने के लिए आधुनिक संग्रहालय विज्ञान तकनीकों का उपयोग करना।
यूपीएससी लिंक: सांस्कृतिक विरासत संरक्षण
4. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का विस्तार और प्रबंधन
- 35 से अधिक देशों के साथ प्रस्तावित साझेदारी को सफलतापूर्वक क्रियान्वित करना और विभिन्न देशों के साथ समझौता ज्ञापनों का प्रबंधन करना।
- सांस्कृतिक और तकनीकी आदान-प्रदान में आने वाली चुनौतियों का समाधान करना।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, सांस्कृतिक कूटनीति
5. पर्यटक सुविधाओं का विकास और प्रबंधन
- आगंतुकों के लिए विश्व स्तरीय सुविधाएं (जैसे म्यूज़ियोटेल, इको रिसॉर्ट) विकसित करना और उनका प्रभावी ढंग से प्रबंधन करना।
- पर्यटकों की बढ़ती संख्या को समायोजित करने के लिए बुनियादी ढांचे और सेवाओं को बढ़ाना।
यूपीएससी लिंक: पर्यटन विकास, बुनियादी ढांचा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| निर्माण की गति | चरण 1ए के कुछ घटकों (गैलरी 4, 6, लोथल टाउन) का कार्य अभी पूरा होना बाकी है, जिससे संशोधित समय-सीमा पर दबाव है। |
| कलाकृतियों की स्थापना | 1,492 कलाकृतियों की स्थापना के लिए शीघ्र अनुमोदन और विशेषज्ञता की आवश्यकता है ताकि प्रदर्शनी समय पर शुरू हो सके। |
| अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी का समन्वय | 13 देशों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, लेकिन 35 से अधिक देशों के साथ प्रस्तावित साझेदारी का प्रभावी समन्वय एक चुनौती है। |
| दीर्घकालिक वित्तपोषण | परियोजना के विशाल पैमाने और निरंतर रखरखाव के लिए स्थायी वित्तपोषण मॉडल और संसाधन जुटाने की रणनीति आवश्यक है। |
| पर्यटक अनुभव | विश्व स्तरीय पर्यटन अनुभव प्रदान करने के लिए 5डी डोम थिएटर, तटीय राज्य मंडप और अन्य सुविधाओं का उच्च गुणवत्ता वाला विकास सुनिश्चित करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (National Maritime Heritage Complex)
आगे की राह
- परियोजना के विभिन्न चरणों, विशेषकर चरण 1ए के शेष घटकों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने के लिए निर्माण की गति को तेज करना।
- कलाकृतियों की स्थापना के लिए आवश्यक अनुमोदन प्रक्रियाओं में तेजी लाना और प्रदर्शनी को आगंतुकों के लिए समय पर खोलने हेतु विशेषज्ञता का उपयोग करना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करना, शेष 22 से अधिक देशों के साथ साझेदारी को अंतिम रूप देना और कलाकृतियों तथा अनुसंधान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।
- स्थायी वित्तपोषण मॉडल विकसित करना, जिसमें CSR, अंतर्राष्ट्रीय अनुदान और अन्य स्रोतों से संसाधन जुटाने पर ध्यान केंद्रित किया जाए।
- लोथल में चल रही खुदाई को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के साथ समन्वय में तेजी से पूरा करना, ताकि नई खोजों को संग्रहालय में शामिल किया जा सके।
- पर्यटक सुविधाओं (जैसे म्यूज़ियोटेल, इको रिसॉर्ट) और समुद्री अनुसंधान संस्थान (MRI) के विकास में गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करना।
- राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर उपनियमों के प्रभावी कार्यान्वयन के माध्यम से सोसायटी के शासन ढांचे को मजबूत करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर · लोथल · सिंधु घाटी सभ्यता · समुद्री विरासत · पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय · सांस्कृतिक कूटनीति · पर्यटन संवर्धन · पुरातत्व सर्वेक्षण · आधारभूत संरचना विकास · सार्वजनिक-निजी भागीदारी
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 49’, ‘note’: ‘राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों का संरक्षण’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A(f)’, ‘note’: ‘समन्वित संस्कृति की रक्षा का कर्तव्य’}
अवधारणा प्रवाह
प्राचीन लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर की स्थापना → भारत की समुद्री विरासत का संरक्षण और प्रदर्शन → अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और साझेदारी का विस्तार → पर्यटन, शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा → आर्थिक संवृद्धि और सांस्कृतिक कूटनीति में वृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. NMHC गुजरात के लोथल में स्थापित किया जा रहा है, जो सिंधु घाटी सभ्यता का एक महत्वपूर्ण स्थल है।
2. यह परियोजना भारत की पांच सहस्राब्दियों से अधिक पुरानी समुद्री विरासत को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
3. NMHC को केवल भारत सरकार के वित्तपोषण से विकसित किया जा रहा है, इसमें कोई अंतर्राष्ट्रीय सहयोग शामिल नहीं है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। NMHC गुजरात के लोथल में स्थापित किया जा रहा है, जो सिंधु घाटी सभ्यता का एक महत्वपूर्ण स्थल है, और इसका उद्देश्य भारत की पांच सहस्राब्दियों से अधिक पुरानी समुद्री विरासत को प्रदर्शित करना है। कथन 3 गलत है क्योंकि परियोजना में पुर्तगाल, यूएई, वियतनाम, थाईलैंड, नीदरलैंड, डेनमार्क, ओमान, इज़राइल, जर्मनी, दक्षिण कोरिया, इटली, न्यूजीलैंड और सिंगापुर सहित 13 देशों ने सहयोग के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं और 35 से अधिक देशों के साथ साझेदारी की प्रस्तावित योजना है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) के प्रस्तावित घटकों में शामिल है/हैं?
1. एक 5D डोम थिएटर
2. तटीय राज्य मंडप
3. प्रकाशस्तंभ संग्रहालय
4. समुद्री अनुसंधान संस्थान (MRI)
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनें:
- केवल 1 और 2
- केवल 3 और 4
- केवल 1, 2 और 3
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — सभी चार घटक – एक 5D डोम थिएटर, तटीय राज्य मंडप, प्रकाशस्तंभ संग्रहालय और समुद्री अनुसंधान संस्थान (MRI) – राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) के प्रस्तावित चरण 1बी और चरण 2 की योजनाओं में शामिल हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को संरक्षित करने और प्रदर्शित करने में किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है? भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और पर्यटन संवर्धन में इसकी क्षमता का विश्लेषण करें। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) लोथल, गुजरात में स्थापित किया जा रहा है, जो सिंधु घाटी सभ्यता का एक महत्वपूर्ण स्थल है। इसका उद्देश्य भारत की 5,000 से अधिक वर्षों की समुद्री विरासत को पुनर्जीवित करना और प्रदर्शित करना है।
2. NMHC की भूमिका (संरक्षण और प्रदर्शन):
– प्राचीन बंदरगाह शहर लोथल के महत्व पर प्रकाश डालना।
– पांच सहस्राब्दियों से अधिक की समुद्री यात्राओं, व्यापार मार्गों और नौवहन कौशल का प्रदर्शन।
– कलाकृतियों, प्रतिकृतियों, जहाज मॉडलों और इंटरैक्टिव प्रदर्शनियों के माध्यम से विरासत का संरक्षण।
– समुद्री अनुसंधान संस्थान (MRI) के माध्यम से समुद्री इतिहास और पुरातत्व में अनुसंधान को बढ़ावा देना।
– प्रकाशस्तंभ संग्रहालय जैसे घटकों के माध्यम से समुद्री ज्ञान का प्रसार।
3. सांस्कृतिक कूटनीति में क्षमता:
– 13 देशों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर और 35 से अधिक देशों के साथ साझेदारी की योजना का उल्लेख।
– कलाकृतियों, प्रतिकृतियों और जहाज मॉडलों के आदान-प्रदान के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय सहयोग।
– अनुसंधान सहयोग और सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ावा देना।
– भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ को बढ़ाना और वैश्विक मंच पर इसकी समुद्री पहचान को मजबूत करना।
– ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के सिद्धांत के अनुरूप समुद्री संबंधों को सुदृढ़ करना।
4. पर्यटन संवर्धन में क्षमता:
– लोथल को एक विश्व स्तरीय समुद्री विरासत, ज्ञान और पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करना।
– 5D डोम थिएटर, तटीय राज्य मंडप, म्यूज़ियोटेल और इको रिसॉर्ट जैसे आकर्षणों का विकास।
– धोलेरा एक्सप्रेसवे और उच्च गति रेल गलियारे जैसी बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ उठाना।
– स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना और रोजगार के अवसर पैदा करना।
– घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करना, जिससे ‘देखो अपना देश’ पहल को बल मिलेगा।
5. निष्कर्ष: NMHC भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को पुनर्जीवित करने, सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा देने और पर्यटन को गति देने में एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक के रूप में कार्य करेगा, जिससे यह एक वैश्विक केंद्र बन जाएगा।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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