झारखंड: जल जीवन मिशन की रुकी योजनाओं को गति देने के लिए केंद्र से 6500 करोड़ रुपये की मांग

झारखंड: जल जीवन मिशन की रुकी योजनाओं को रफ्तार देने की तैयारी, केंद्र से 6500 करोड़ की राशि जारी करने की मांग — diagram

झारखंड: जल जीवन मिशन की रुकी योजनाओं को गति देने के लिए केंद्र से 6500 करोड़ रुपये की मांग

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Jal Jeevan Mission funding flow

✎ जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण घर में नल से जल उपलब्ध कराना है, जो जल सुरक्षा और ग्रामीण विकास के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, विकास और उससे संबंधित मुद्दे  |  GS Paper III — आधारभूत संरचना: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि
  • Prelims: जल जीवन मिशन, हर घर जल, जल शक्ति मंत्रालय, केंद्र प्रायोजित योजना, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति
  • Essay: ग्रामीण विकास में आधारभूत संरचना का महत्व, जल सुरक्षा और सतत विकास लक्ष्य

त्वरित पुनरावृत्ति: जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण घर में नल से जल उपलब्ध कराना है, जो जल सुरक्षा और ग्रामीण विकास के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

झारखंड सरकार ने केंद्र सरकार से जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) के तहत लगभग 6,500 करोड़ रुपये की बकाया राशि तुरंत जारी करने की मांग की है। राज्य सरकार का तर्क है कि इस राशि के मिलने से राज्य में अधूरी पड़ी पेयजल योजनाओं को तेजी से पूरा किया जा सकेगा और ग्रामीण आबादी को 100 प्रतिशत शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लक्ष्य को गति मिलेगी। यह मुद्दा केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा दिल्ली में आयोजित एक शिखर सम्मेलन में उठाया गया, जिसमें राज्यों के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रियों ने भाग लिया।

पृष्ठभूमि

  • जल जीवन मिशन को प्रधानमंत्री द्वारा 15 अगस्त 2019 को शुरू किया गया था, जिसका लक्ष्य 2024 तक देश के प्रत्येक ग्रामीण घर में नल से जल (हर घर जल) उपलब्ध कराना है।
  • यह मिशन जल शक्ति मंत्रालय के तहत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
  • मिशन का मुख्य उद्देश्य व्यक्तिगत घरेलू नल कनेक्शन, सामुदायिक जल शोधन संयंत्रों और जल स्रोतों के संवर्धन के माध्यम से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है।
  • यह एक केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) है, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच लागत साझा की जाती है। हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए केंद्र का योगदान 90 प्रतिशत है, जबकि अन्य राज्यों के लिए यह 50 प्रतिशत है। केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 100 प्रतिशत वित्तपोषण केंद्र सरकार करती है।
  • मिशन जल गुणवत्ता निगरानी और परीक्षण, ग्रेवाटर प्रबंधन (Greywater Management) और वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) पर भी ध्यान केंद्रित करता है।
  • मिशन में स्थानीय समुदायों, विशेषकर ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (Village Water and Sanitation Committees) की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया गया है।

जल जीवन मिशन क्या है?

  • जल जीवन मिशन (JJM) का लक्ष्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण घर में कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (Functional Household Tap Connection – FHTC) के माध्यम से प्रति व्यक्ति प्रति दिन 55 लीटर पानी उपलब्ध कराना है।
  • यह मिशन जल आपूर्ति प्रणालियों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण जैसे उपायों को भी बढ़ावा देता है।
  • मिशन के तहत जल गुणवत्ता परीक्षण को प्राथमिकता दी जाती है, जिसमें स्थानीय समुदायों को जल परीक्षण किट और प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
  • यह योजना विकेन्द्रीकृत दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसमें ग्राम पंचायतें और स्थानीय समुदाय जल आपूर्ति योजनाओं की योजना, कार्यान्वयन, प्रबंधन, संचालन और रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • मिशन का उद्देश्य न केवल नल से जल उपलब्ध कराना है, बल्कि जल स्रोतों की स्थिरता, जल आपूर्ति प्रणालियों के संचालन और रखरखाव पर भी ध्यान केंद्रित करना है।
  • यह मिशन सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goal – SDG) 6 को प्राप्त करने में योगदान देता है, जिसका लक्ष्य सभी के लिए पानी और स्वच्छता की उपलब्धता और सतत प्रबंधन सुनिश्चित करना है।
  • मिशन के तहत ‘कैच द रेन’ जैसे अभियान भी चलाए जाते हैं, जो जल संचयन में जनभागीदारी को प्रोत्साहित करते हैं।
  • झारखंड जैसे पहाड़ी और वन-आच्छादित राज्यों में, हर घर तक नल से स्वच्छ पेयजल पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता और बेहतर समन्वय की आवश्यकता होती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
हर घर नल से जल ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना, जल जनित बीमारियों को कम करना।
जल स्रोतों की स्थिरता दीर्घकालिक पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित करना और भूजल स्तर को बनाए रखना।
जनभागीदारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, संचालन और रखरखाव में स्थानीय समुदायों की भूमिका।
केंद्र-राज्य समन्वय वित्तीय सहायता के सुचारु प्रवाह और परियोजनाओं के समय पर पूरा होने के लिए आवश्यक।
वित्तीय आवंटन परियोजनाओं के क्रियान्वयन और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए आवश्यक पूंजी।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • ग्रामीण आबादी को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराकर स्वास्थ्य और स्वच्छता में सुधार।
  • महिलाओं और बालिकाओं पर पानी लाने के बोझ को कम करना, जिससे उनकी शिक्षा और आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ सकेगी।
  • जल जनित बीमारियों (जैसे डायरिया, हैजा) की घटनाओं में कमी लाकर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर बोझ कम करना।

आर्थिक महत्व

  • पेयजल परियोजनाओं के क्रियान्वयन से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन।
  • स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से उत्पादकता में वृद्धि और स्वास्थ्य संबंधी खर्चों में कमी।
  • बुनियादी ढांचा विकास (पाइपलाइन, जल उपचार संयंत्र) में निवेश से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा।

शासनिक महत्व

  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को मजबूत करना।
  • योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी के माध्यम से सुशासन (Good Governance) सुनिश्चित करना।
  • नीति निर्माण और क्रियान्वयन में स्थानीय निकायों और समुदायों की भागीदारी को बढ़ावा देना।

चुनौतियाँ

1. वित्तीय बाधाएँ

  • केंद्र से समय पर धन का आवंटन न होना परियोजनाओं को धीमा कर देता है।
  • राज्य सरकारों के पास परियोजनाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की कमी।

2. भौगोलिक चुनौतियाँ

  • पहाड़ी और जंगली क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछाना और बुनियादी ढाँचा स्थापित करना मुश्किल।
  • दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुँचने और सामग्री परिवहन की उच्च लागत।

3. जल स्रोतों की स्थिरता

  • भूजल स्तर में गिरावट और जल स्रोतों के सूखने का खतरा।
  • जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) के उपायों का अपर्याप्त क्रियान्वयन।

4. संचालन और रखरखाव

  • पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं के प्रभावी संचालन और रखरखाव के लिए पर्याप्त तंत्र का अभाव।
  • स्थानीय समुदायों और पंचायतों की क्षमता निर्माण में कमी।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
धन का विलंबित आवंटन परियोजनाओं के पूरा होने में देरी और लागत में वृद्धि।
पहाड़ी/जंगली क्षेत्र बुनियादी ढाँचे के निर्माण और रखरखाव में कठिनाई।
जल स्रोतों का सूखना पेयजल आपूर्ति की दीर्घकालिक स्थिरता पर खतरा।
रखरखाव की कमी परियोजनाओं की दक्षता और दीर्घायु पर नकारात्मक प्रभाव।
जनभागीदारी का अभाव योजनाओं के स्वामित्व और स्थायित्व में कमी।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission)
  • कैच द रेन (Catch the Rain)

आगे की राह

  • केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को समय पर और पर्याप्त वित्तीय सहायता का प्रावधान सुनिश्चित करना।
  • राज्यों को जल जीवन मिशन के तहत परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली भौगोलिक चुनौतियों के लिए विशेष पैकेज देना।
  • जल स्रोतों की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharging) जैसे उपायों को प्राथमिकता देना।
  • परियोजनाओं के संचालन और रखरखाव के लिए स्थानीय निकायों (जैसे ग्राम पंचायत) की क्षमता का निर्माण करना और उन्हें सशक्त बनाना।
  • जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान चलाना और समुदाय आधारित जल प्रबंधन को प्रोत्साहित करना।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और नियमित समीक्षा बैठकों का आयोजन करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

जल जीवन मिशन · हर घर जल · पेयजल आपूर्ति · केंद्र-राज्य संबंध · वित्तीय संघवाद · ग्रामीण विकास · जल संरक्षण · सतत विकास लक्ष्य · योजनाओं का क्रियान्वयन · राजकोषीय हस्तांतरण

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 280: वित्त आयोग की सिफारिशें
  • अनुच्छेद 282: केंद्र और राज्यों द्वारा अनुदान
  • अनुच्छेद 243G: पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व

अवधारणा प्रवाह

केंद्र से धन की मांग  →  धन का विलंबित आवंटन  →  पेयजल परियोजनाओं का रुकना  →  ग्रामीण आबादी को स्वच्छ जल की कमी  →  स्वास्थ्य और सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर नकारात्मक असर  →  केंद्र-राज्य समन्वय की आवश्यकता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस मिशन का लक्ष्य वर्ष 2024 तक देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल से कार्यात्मक घरेलू कनेक्शन (Functional Household Tap Connection – FHTC) प्रदान करना है।
2. यह जल शक्ति मंत्रालय के तहत क्रियान्वित किया जा रहा है।
3. मिशन के तहत जल गुणवत्ता निगरानी और परीक्षण पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल से जल उपलब्ध कराना है। कथन 2 भी सही है। यह मिशन जल शक्ति मंत्रालय के तहत आता है। कथन 3 गलत है। मिशन के तहत जल गुणवत्ता निगरानी और परीक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिसमें सामुदायिक भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जाता है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन जल जीवन मिशन के उद्देश्यों को सर्वोत्तम रूप से दर्शाता है?

  1. शहरी क्षेत्रों में सीवेज उपचार संयंत्रों का निर्माण करना।
  2. ग्रामीण क्षेत्रों में केवल सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराना।
  3. वर्ष 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना।
  4. औद्योगिक इकाइयों को जल आपूर्ति सुनिश्चित करना।

उत्तर: वर्ष 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना। — जल जीवन मिशन का प्राथमिक उद्देश्य वर्ष 2024 तक भारत के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल से स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ जल जीवन मिशन के उद्देश्यों और चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। केंद्र एवं राज्यों के बीच वित्तीय सहयोग तथा समन्वय इस मिशन की सफलता में किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) का संक्षिप्त परिचय, इसके लॉन्च की तिथि (2019) और प्राथमिक लक्ष्य (2024 तक हर ग्रामीण घर में नल से जल) का उल्लेख।
2. **उद्देश्य:** मिशन के प्रमुख उद्देश्यों को सूचीबद्ध करें, जैसे: FHTC प्रदान करना, जल गुणवत्ता निगरानी, जल संरक्षण, ग्रे-वाटर प्रबंधन, सामुदायिक भागीदारी, जल स्रोतों का स्थायित्व।
3. **चुनौतियाँ:** मिशन के क्रियान्वयन में आने वाली प्रमुख चुनौतियों का विश्लेषण करें, जैसे: पहाड़ी और वन क्षेत्रों में भौगोलिक बाधाएँ, वित्तीय संसाधनों की कमी/विलंब, जल स्रोतों का सूखना, रखरखाव और संचालन की समस्याएँ, जनभागीदारी का अभाव, राज्यों की क्षमता संबंधी मुद्दे।
4. **केंद्र-राज्य वित्तीय सहयोग और समन्वय का महत्व:**
* **वित्तीय सहयोग:** केंद्र और राज्यों के बीच निधि साझाकरण पैटर्न (जैसे 90:10, 50:50), केंद्रीय सहायता का महत्व, समय पर धन जारी करने की आवश्यकता, बकाया राशि का प्रभाव (झारखंड का उदाहरण)।
* **समन्वय:** नीतियों के निर्माण और क्रियान्वयन में समन्वय की भूमिका, तकनीकी सहायता, क्षमता निर्माण, राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं को समझना, ‘कैच द रेन’ जैसे कार्यक्रमों में संयुक्त प्रयास।
* **सफलता में भूमिका:** स्पष्ट करें कि कैसे प्रभावी वित्तीय हस्तांतरण और सुदृढ़ समन्वय से परियोजनाओं में तेजी आती है, बाधाएँ दूर होती हैं, और मिशन के लक्ष्यों की प्राप्ति संभव होती है।
5. **निष्कर्ष:** मिशन की सफलता के लिए सतत प्रयासों, मजबूत केंद्र-राज्य साझेदारी और जनभागीदारी के महत्व पर बल देते हुए एक संतुलित निष्कर्ष।

स्रोत: amarujala.com

Jharkhand PCS (JPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: झारखंड में ‘जल जीवन मिशन’ के अंतर्गत रुकी हुई योजनाओं को पुनः गति देने के लिए राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार से कितनी राशि की मांग की गई है?

  1. 5000 करोड़ रुपए
  2. 6500 करोड़ रुपए
  3. 7200 करोड़ रुपए
  4. 8000 करोड़ रुपए

उत्तर: 6500 करोड़ रुपए — झारखंड सरकार ने जल जीवन मिशन की रुकी हुई योजनाओं को पुनः शुरू करने के लिए केंद्र सरकार से 6500 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि की मांग की है।

Mains: झारखंड में ‘जल जीवन मिशन’ के क्रियान्वयन में आने वाली प्रमुख चुनौतियों का विश्लेषण करते हुए, राज्य की जल संसाधन नीति एवं जनजातीय समुदायों के जल अधिकार सुनिश्चित करने के उपाय सुझाइए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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